अडानी भारत का रोथ्स्चाइल्ड है. मात्र 7 साल में गुजरात का एक क्षेत्रीय व्यापारी आज देश के लगभग हर धंधे और संसाधन पे कब्ज़ा कर चुका है. घर, बिजली, पानी, तेल, दाल, अनाज, सड़क, रेल, एयरपोर्ट, सी पोर्ट, स्टेशन से लेकर हॉस्पिटल और NGO तक सब में अडानी का कब्ज़ा हो गया है.

अडानी भारत का रोथ्स्चाइल्ड है. मात्र 7 साल में गुजरात का एक क्षेत्रीय व्यापारी आज देश के लगभग हर धंधे और संसाधन पे कब्ज़ा कर चुका है. घर, बिजली, पानी, तेल, दाल, अनाज,  सड़क, रेल, एयरपोर्ट, सी पोर्ट, स्टेशन से लेकर हॉस्पिटल और NGO तक सब में अडानी का कब्ज़ा हो गया है.

जायज सवाल ये है की इनमे से कितनी चीजें अडानी ने खुद बनाई है ? या कितने में उसका पैसा लगा है ? जवाब  है 99% चीजें उसे सरकार ने गिफ्ट की है और 99.99% चीजों में उसका नहीं आपका पैसा लगा है. उसकी तरफ जो आँख उठाएगा वो आज देश में सुरक्षित नहीं रहेगा.

छत्तीसगढ़ कांग्रेस सरकार ने राहुल गाँधी के हस्तक्षेप के बाद हसदेव जंगल में अडानी खदान का विरोध किया तो अडानी ने राहुल गाँधी के पीछे ED लगा दी. वरना कोई ED से पूछे की अगर सुब्रमण्यन द्वारा ये केस 8 साल पहले रिपोर्ट हुआ तो आज तक आप घास काट रहे थे ?

और अडानी की पूँछ पे पांव पड़ते ही फटाक से सुबूत मिल गए. ?

मैं वर्तमान कांग्रेस के तरीको का समर्थक नहीं हूँ लेकिन आज उसे मिटाने की जो कोशिश हो रही है वो गलत है. आज उसका साथ देना चाहिए. लोकतंत्र के लिए हमें एक विपक्ष की सख्त जरूरत हमेशा रहेगी. #कालचक्र #नवनिर्माण

Comments

Popular posts from this blog

My thesis on Brahmin Privilege (read the entire thred)1. If I am a Brahmin, I will be revered in the society and a “Ji” will be added to my name. I will be known as a pundit, although I. #dilip c mandal

ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)