केरल हाई कोर्ट के सिटिंग जज जस्टिस चितम्बरेश ने ब्राह्मण समाज को सलाह दी है

केरल हाई कोर्ट के सिटिंग जज जस्टिस चितम्बरेश ने ब्राह्मण समाज को सलाह दी है  कि वह  जातिगत आरक्षण का  विरोध करे  ,,,,  लेकिन  में  ब्राह्मण समाज के लोगों  को सलाह देता हूँ  कि वह जस्टिस चितम्बरस के बहकावे में नही आये  ,,,,   और  जातिगत आरक्षण का तब तक विरोध नही करे जब तक कि  देश मे जातीया मौजूद है  ,,,,  में ब्राह्मण समाज को यह भी सलाह देता हूँ कि वह जातिगत आरक्षण का विरोध नही करे बल्कि मनु स्मर्ती का  व वर्ण  व्यवस्था का विरोध करे जिसके कि कारण संविधान में  आरक्षण के प्रावधानो को लाना  जरूरी हुआ  ,,,,  वर्ण व्यवस्था के कारण कालांतर में अनु जाती , जान जाती  व ओबीसी के लोग  सामाजिक , आर्थिक व राजनीतिक रूप से इतने पिछड़ गए थे कि उनकी स्तिथि किसी जानवर से कम नही थी ,,,, जस्टिस चितम्बरेश सरीखे  मामूली व एक तरफा सोच रखने वाले लोगो को ऐसा लगता है जैसे कि  जातिगत आरक्षण कोई  बहुत  बुरी चीज है  परंतु उन्हें यह पता नही  कि  देश को बचाये रखने के लिए व साथ ही  हिन्दू धर्म को बचाये रखने के लिए बाबा साहब अम्बेडकर को संविधान में आरक्षण के प्रावधान करना जरूरी हुआ  ,,,,  देश के अनु जाती जन  जाती व  ओबीसी के लोगो को राष्ट्र की मुख्य धारा में लाने के लिए आरक्षण लाना बहुत जरूरी था  ,,,,  इसे यूं भी कह सकते  है  कि अगर आरक्षण नही होता तो देश के अनु जाती , जान जाती व ओबीसी के 99 %  लोग अब तक  दूसरे धर्मों में चले गए होते  ,,,,  और तब  हिन्दू धर्म वालो की स्तिथि व  जन संख्या भारत मे भी वैसी  ही होती जैसी  कि आज अफगानिस्तान , पाकिस्तान व बंगला देश मे है  ,,,,  में दावे के साथ कह सकता हूँ कि आज भी यदि आरक्षण को खत्म किया जाएगा  तो देश के सारे नही तो 99 %  अनु जाती जन जाती व ओबीसी के लोग मुसलमान , सिख , ईसाई व बुध बन जाएंगे और तब हिन्दू धर्म के पास कुछ भी नही बचेगा  ,,,, और  किसी को मेरी इस बात पर यकीन नही है तो ऐसा करके देख लो , पता पड़ जायेगा ,,,,  तब हिन्दू कहीं के नही रहेंगे ,  न घर के और न घाट के  ,,,, तब बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन होगा और  नही हो तो हमसे  कहना  ,,,,, जस्टिस चितम्बरेश सरीखे लोग ब्राह्मणो को गलत दिशा में धकेल रहे है और साथ ही साथ उन्हें अनु जाति जन जाती ओबीसी की नजरों में भी  गिरा रहे है  ,,,  चीताम्बरेस सरिखे लोगो के  बयानों से देश मे अराजकता का माहौल  पैदा होता है  जिससे आगे चलकर  देश के और भी  टुकड़े  हो सकते  है  ,,,,  में केरल हाई कोर्ट के जज जस्टिस चितम्बरेश के इस बयान को देश के लिए  हानिकारक मानता हूँ और उसकी निंदा भी  करता  हूँ  ,,,,  इस बयान के बाद देश के अनु जाती जन जाती ओबीसी के लोग यह सोचने को मजबूर हो गए है कि केरल हाई कोर्ट का यह जज , जब खुल्लम खुल्ला इस तरह  संवैधानिक प्रावधानों का विरोध करता है तो वह सीट पर बैठ कर क्या न्याय करता होगा  ,,,,  

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