मेरा मुसलमान शासकों पर आरोप है कि उन्होंने इतने लंबे समय तक शासन करने के बावजूद, हिंदुओं में समाज सुधार का कोई काम नहीं किया। हालाँकि इसका उन्हें फ़ायदा भी मिला। 900 (थोड़ा घटा बढ़ा लीजिए) साल में कभी कोई विद्रोह नहीं हुआ।
मेरा मुसलमान शासकों पर आरोप है कि उन्होंने इतने लंबे समय तक शासन करने के बावजूद, हिंदुओं में समाज सुधार का कोई काम नहीं किया। हालाँकि इसका उन्हें फ़ायदा भी मिला। 900 (थोड़ा घटा बढ़ा लीजिए) साल में कभी कोई विद्रोह नहीं हुआ।
ये शासक सुधार के चक्कर में पड़े ही नहीं। उन्होंने हिंदू सवर्णों को बड़ी संख्या में मनसबदार, दरबारी, नवरत्न, सेनापति, राजा आदि बनाकर उन्हें सत्ता में हिस्सा दिया।
बाक़ी जनता के ये लोग कंट्रोल करते थे।
वहीं, अंग्रेज हिंदुओं को सभ्य बनाने की कोशिश करने की गलती कर बैठे। औरत को ज़िंदा जलाने वाली प्रथा सती पर रोक लगा दी। विधवा विवाह शुरू करा दिया। महिला के साथ सेक्स करने की न्यूनतम उम्र तय करके बाल विवाह को कंट्रोल करने की कोशिश की। बच्चों की बलि बंद करवा दी। शूद्रों को स्कूल ले जाने लगे। अछूतों को फौज में भर्ती कर लिया।
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