एक_व्यक्ति_बोल_रहा_है_मेरी_आपकी#पोस्ट_से_भावनाएं आहत होती है उससे में कहना चाहता हूँ की आपकी इतनी #कमजोर है जो सच से आहत होती है तो मुझे ब्लाक कर दो नहीं तो तुम्हारी भावनाये हर रोज आहत होगी,

#एक_व्यक्ति_बोल_रहा_है_मेरी_आपकी
#पोस्ट_से_भावनाएं आहत होती है उससे में कहना चाहता हूँ की आपकी इतनी #कमजोर  है जो सच से आहत होती है तो मुझे ब्लाक कर दो नहीं तो तुम्हारी भावनाये हर रोज आहत होगी,

 क्योंकि सच्चाई लिखना में बन्द नहीं करुगाँ अंधविश्वास पाखंड #भेदभाव_छुआछूत के खिलाफ लिखता रहुगाँ
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1977 की बात है,#मद्रास_हाईकोर्ट में एक याचिका आई जिसमें कहा गया था कि तमिलनाडु में पेरियार की मूर्तियों के नीचे जो बातें लिखी हुई हैं, वे आपत्तिजनक हैं और लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती हैं इसलिए उन्हें हटाया जाना चाहिए।

याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि #रामास्वामी_पेरियार जो कहते थे, उस पर विश्वास रखते थे इसलिए उन के शब्दों को उन की मूर्तियों के पैडेस्टर पर लिखवाना गलत नहीं है।

पेरियार की मूर्तियों के नीचे लिखा था- ‘ईश्वर नहीं है और ईश्वर बिलकुल नहीं है। जिस ने ईश्वर को रचा वह बेवकूफ है, जो ईश्वर का प्रचार करता है वह दुष्ट है और जो ईश्वर की पूजा करता है वह बर्बर है।’

ग्रेट पेरियार नायकर के ईश्वर से सवाल :

1. क्या तुम कायर हो जो हमेशा छिपे रहते हो, कभी किसी के सामने नहीं आते?

2. क्या तुम खुशामद परस्त हो जो लोगों से दिन रात पूजा, अर्चना करवाते हो?

3. क्या तुम हमेशा भूखे रहते हो जो लोगों से मिठाई, दूध, घी आदि लेते रहते हो ?

4. क्या तुम मांसाहारी हो जो लोगों से निर्बल पशुओं की बलि मांगते हो?

5. क्या तुम सोने के व्यापारी हो जो मंदिरों में
लाखों टन सोना दबाये बैठे हो?

6. क्या तुम व्यभिचारी हो जो मंदिरों में देवदासियां रखते हो ?

7. क्या तुम कमजोर हो जो हर रोज होने वाले बलात्कारों को नही रोक पाते?

8. क्या तुम मूर्ख हो जो विश्व के देशों में गरीबी-भुखमरी होते हुए भी अरबों रुपयों का अन्न, दूध,घी, तेल बिना खाए ही नदी नालों में बहा देते हो?

9. क्या तुम बहरे हो जो बेवजह मरते हुए आदमी, बलात्कार होती हुयी मासूमों की आवाज नहीं सुन पाते?

10. क्या तुम अंधे हो जो रोज अपराध होते हुए नहीं देख पाते?

11. क्या तुम आतंकवादियों से मिले हुए हो जो रोज धर्म के नाम पर लाखों लोगों को मरवाते रहते हो?

12. क्या तुम आतंकवादी हो जो ये चाहते हो कि लोग तुमसे डरकर रहें?

13. क्या तुम गूंगे हो जो एक शब्द नहीं बोल पाते लेकिन करोड़ों लोग तुमसे लाखों सवाल पूछते हैं?

14. क्या तुम भ्रष्टाचारी हो जो गरीबों को कभी कुछ नहीं देते जबकि गरीब पशुवत काम करके कमाये गये पैसे का कतरा-कतरा तुम्हारे ऊपर न्यौछावर कर देते हैं?

15. क्या तुम मुर्ख हो कि हम जैसे नास्तिकों को पैदा किया जो तुम्हे खरी खोटी सुनाते रहते हैं और तुम्हारे अस्तित्व को ही नकारते हैंं?

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