मधेपुरा के महाराज महानायक महान स्वतंत्रता सेनानी बाबू रास बिहारी लाल मंडल के घर 25 अगस्त 1918 को जन्मे महानायक स्वंत्रता सेनानी डा बी. पी. मंडल साहब। विद्यार्थी जीवन से समानता के लिए आंदोलन किया, 1965 में पामा गांव की घटना जिसमे ओबीसी और दलित पर बर्बर अत्याचार हुआ था,

मधेपुरा के महाराज महानायक महान स्वतंत्रता सेनानी बाबू रास बिहारी लाल मंडल के घर 25 अगस्त 1918 को जन्मे महानायक स्वंत्रता सेनानी डा बी. पी. मंडल साहब। विद्यार्थी जीवन से समानता के लिए आंदोलन किया, 1965 में पामा गांव की घटना जिसमे ओबीसी और दलित पर बर्बर अत्याचार हुआ था, को लेकर बिहार विधान सभा में कांग्रेस खिलाफ गरजते हुए कांग्रेस से त्याग पत्र दे दिया। अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग बिहार प्रदेश के अध्यक्ष हुए।
1964 में पेरियार के आत्म सम्मान आंदोलन में लाखो की मदद की और उसे उत्तर भारत लेकर आए। आत्म सम्मान आंदोलन से समर्थन में राजस्थान, बिहार, मध्यप्रदेश, बंगाल, हरियाणा, कश्मीर, आदि राज्यों में सभाएं की भाषण दिया।
बिहार पिछड़ा वर्ग संघ के आर्थिक आधार और सामाजिक समर्थक थे। 1968 में कांग्रेस और संसोपा से अलग एक ओबीसी सरकार का गठन बाबू जगदेव प्रसाद के साथ मिलकर किया।
जिसमें 90% बहुजन थे। 1979 में दुनिया के विचारो के हिसाब से सर्वमान्य ओबीसी वर्ग का निर्माण किया। जिससे देश की 60 फीसदी को न्याय मिला।
मंडल के विचारो के अनुसार ओबीसी में क्रिमिलेयर नहीं होना चाहिए। 
कुछ लोग बिना मंडल और मंडल अनुशंसा को बिना पढ़े आरोप लगा देते हैं।
ओबीसी में क्रिमिलेयर कोर्ट ने लागू किया। तब मंडल साहब की मृत्यु हो चुकी थी।

जोहार मंडल।

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My thesis on Brahmin Privilege (read the entire thred)1. If I am a Brahmin, I will be revered in the society and a “Ji” will be added to my name. I will be known as a pundit, although I. #dilip c mandal

ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)