कबीरा तेरे जगत में, देखी उल्टी रीत..साधु सन्त राज करे, पढ़े लिखे मांगे भीख.. .*****. ** पहले जानों फिर मानों *******
कबीरा तेरे जगत में, देखी उल्टी रीत..
साधु सन्त राज करे, पढ़े लिखे मांगे भीख...
******* पहले जानों फिर मानों *******
किसी बात को सिर्फ इसलिए मत मानो की ऐसा सदियों से होता आया है.
परम्परा है या सुनने में आया है.
इसलिए भी मत मानो की किसी धर्म शास्त्र ग्रंथों में लिखा हुआ है.
या ज्यादातर लोग मानते है.
किसी धर्मगुरु, आचार्य, साधु - सन्त, ज्योतिषी ने कहा है.
किसी भी बात को आंख मून्दकर मत मानों.
किसी बात को सिर्फ इसलिए भी मत मान लेना की वह तुमसे कोई बड़ा या आदरणीय व्यक्ति कह रहा हो, या बहोत ही करीब का व्यक्ति कह रहा हो.
बल्कि हर बात को पहले अपनी तर्क, बुध्दी व चिंतन की कसौटी पर तोलना कसना फिर मानना.
और यदि वह बात स्वयं के लिए, समाज व संपूर्ण मानव जगत के कल्याण के हित लगे तो ही मानों.
--- कोई भी बात तर्कशील होनी चाहिए ---
***** अपना दीपक स्वयं बनें *****
*** तथागत गौतम बुध्द ***
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