"इस दासता का उन्मूलन आपको स्वयं ही करना है। इसके लिए ईश्वर या किसी दैविक शक्ति पर निर्भर न रहें। आपकी मुक्ति तो आपकी राजनीतिक शक्तियों में है न कि तीर्थ यात्राओं या उपवास करने में। धर्मग्रंथों के प्रति निष्ठा से आपको अपने दासता के बंधनों, अभावों व गरीबी से मुक्ति नहीं मिल सकती।
"इस दासता का उन्मूलन आपको स्वयं ही करना है। इसके लिए ईश्वर या किसी दैविक शक्ति पर निर्भर न रहें। आपकी मुक्ति तो आपकी राजनीतिक शक्तियों में है न कि तीर्थ यात्राओं या उपवास करने में। धर्मग्रंथों के प्रति निष्ठा से आपको अपने दासता के बंधनों, अभावों व गरीबी से मुक्ति नहीं मिल सकती।
तुम्हारे पूर्वज ये सब पीढ़ी दर पीढ़ी करते आए हैं पर उन्हें दुःखद जीवन से नाम मात्र भी राहत नहीं मिली। तुम अपने पूर्वजों की ही तरह चिथड़े पहनते हो। उनकी तरह तुम फेंके हुए, बचे-खुचे टुकड़ों पर जीते हो, उनकी तरह गंदी बस्तियों में, गंदी झोपड़ियों में सड़ रहे हो और उन्हीं की तरह बीमारियों के आसान शिकार होते हो और मुर्गियों के चूज़ों की भांति मरते हो। आपके धार्मिक उपवासों, संयम व प्रायश्चित ने भी आपको भुखमरी से नहीं बचाया।
इसलिए आप कानून बनाने की शक्ति पर अपना कब्जा बनाओ। अपना ध्यान उपवास, पूजा और प्रायश्चित से हटाकर विधि निर्माण करने की शक्ति को अपने क़ाबू में करने पर करो। इसी में आपकी मुक्ति है। इसी मार्ग से आपकी भुखमरी का अंत होगा। स्मरण रहे कि यह आवश्यक नहीं कि संख्या में लोगों का बहुमत हो। वे हमेशा सतर्क, शक्तिशाली, सुशिक्षित और आत्मसम्मान के प्रति सजग हों, तभी वे सफल होंगे।" - *डॉ० भीमराव अम्बेडकर*
*कोरोना है महामारी, इससे सुरक्षित रहे।*
वंदन
*डॉ० बाबासाहेब अम्बेडकर जन्मभूमि*
Comments