थाईलैंडियों का भारत की सत्ता पर हमेशा पर क़ब्ज़ा करवाने में सबसे शातिर चालें चलने वाला था - मोहनदास कर्मचंद गांधी । उसने अहिंसा के नाम से ऐसी ग़ुलामी की चाशनी चटाई है कि इस देश में जो कमीने क़िस्म के हुक्मरान हैं उनको कभी कोई ख़तरा नहीं हो सकता ।
थाईलैंडियों का भारत की सत्ता पर हमेशा पर क़ब्ज़ा करवाने में सबसे शातिर चालें चलने वाला था - मोहनदास कर्मचंद गांधी । उसने अहिंसा के नाम से ऐसी ग़ुलामी की चाशनी चटाई है कि इस देश में जो कमीने क़िस्म के हुक्मरान हैं उनको कभी कोई ख़तरा नहीं हो सकता ।
क्योंकि अहिंसक आंदोलन को कुचलने में आततायी शासक को दो मिनट लगते हैं - जबकि बंदूक़ वाले नागरिकों के साथ ये शांति वार्ताऐं करते हैं - जैसे NE वालों के साथ करते हैं -
जब तक नागरिक गांधी के चक्रव्यूह से नहीं निकलेंगे - इसी तरह रोज़ मोमबत्तियाँ जला जलाकर अपने ज़ख़्मों पर मरहम लगाते रहेंगे - अगले ज़ख़्म करने का होसला आततायी राजा को देकर ।
किस हत्यारे शासक को फ़र्क़ पड़ा है मोमबत्ती जलुसों से ? या कि काली पट्टियों से ? या कि भूख हड़तालों से ?
भूतपूर्वक सैनिकों तक के साथ क्या किया गया है ?
लेकिन तुम्हारी कायरता ऐसी सघन है कि अहिंसा का आवरण तुरंत ओढ़ लेते हो ?
यदि जनता ने टकले के लिये हिंसा का ख़तरा पैदा नहीं किया होता तो टिकैत को उसी रात पीट कर भगा देते जिस रात वो रोया था ।
कब तक अपनी कायरता को अहिंसा के आवरण में छुपाओगे ?
हत्यारा हुक्मरान संविधान की शपथ लेकर उसको कूड़े में डालकर आपकी ज़िंदगी तबाह किये रहता है लेकिन आप संविधान के नाम पर अपनी कायरता छिपाते चले जाते हो । हत्यारे शासक की शह पर उसके कुत्ते बीच सड़क पर क़ानून को रोंदकर किसी भी निर्दोष को मार डालते हैं लेकिन आप घुस जाइये क़ानून के नाम पर घर में ।
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