‼️गणेश और लक्ष्मी कौन ‼️ गणपति_का रहस्य_और_ब्राह्मणीकरण
‼️गणेश और लक्ष्मी कौन ‼️
गणपति_का रहस्य_और_ब्राह्मणीकरण
बुद्ध का मतलब ही अष्टविनायक है।
क्योंकि अष्ट का अर्थ है आठ,
विनायक का अर्थ है कल्याणकारी मार्ग,
जिसे बुद्ध के अषटांगिक मार्ग कहते हैं। जिन आठ मार्ग का पालन करके मानव दुखों से मुक्ति पा सकते हैं।
👉 बुद्ध को ही ब्राह्मणों के काल्पनिक गणेश बनाया है।
लोकशाही व्यवस्था में देश का प्रमुख "राष्ट्रपति" होता है, उसी प्रकार प्राचीन भारत में गण व्यवस्था होती थी और उस गण व्यवस्था का प्रमुख "गणपति" होता था।
गण का अर्थ या जनता
और पति का अर्थ है राजा
इस प्रकार गणपति का अर्थ है जनता का राजा
"गणपति बाप्पा मोरया" अर्थात ~ मौर्य राजाओ में गणपती "चन्द्रगुप्त मोरया"
मूलनिवासीयों के राजाओं का कार्यकाल ई.पू.
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1~चन्द्रगुप्त मौर्य 323~299 ई.पू.
2~बिन्दुसार 299~274 ई.पू.
3~सम्राट अशोक 274~138 ई.पू.
4~कृंणाल मौर्य। 238~231 ई.पू.
5~दशरथ मौर्य 231~223 ई.पू.
6~सम्प्रति मौर्य 223~215 ई.पू.
7~शाली शुक्त 215~203 ई.पू.
8~देव वर्मा मौर्य 203~196 ई.पू.
9~सत्यधनु मौर्य 196~190 ई.पू.
10~बृहद्रथ मौर्य 190~184 ई.पू.
🔴इन्ही दश सिरों को मिला कर दश सिरों वाला रावण भी बनाया गया है 🔴
इस मौर्य शासन से पहले प्राचीन भारत में एक राज घराने में "सिद्धार्थ गौतम" नामक राजकुमार का जन्म हुआ था। वही आगे चल कर "शाक्य गण" का प्रमुख हुआ।
कालांतर में सिद्धार्थ ने बुद्धत्व प्राप्त किया।
अब सच्चे गणपति और काल्पनिक गणपति के बीच में का फर्क समझ लेते है...
कूछ चालाक लगो ने सच्चे गणपति को काल्पनिक गणपति बनाया। शाक्य गण का प्रमुख इस नाते से लोग "बुद्ध "को गण का पति अर्थात गणपति कहने लगे थे।
उसी प्रकार-
जब बुद्ध लोगों को धर्म का सन्देश देते थे तब उनके संदेशों में दो शब्दों का मुलभुत रूप से उल्लेख होता था, वे शब्द है,
1~ चित्त और 2 -मल्ल
चित्त यानि शरीर (मन) और मल्ल यानि मल (अशुद्धी) तुम्हारे शरीर व मन से मल निकाल देने पर तुम शुद्ध हो जाओगे और दुःख से मुक्त हो जाओगे। ऐसा बुद्ध कहते थे।
इसी संकल्पना को विकृत कर, ब्राह्मणों ने काल्पनिक पार्वती के शरीर से मल निकालकर एक बालक (अर्थात गणपति) के जन्म की कहानी को प्रस्तुत कर दी।
गौतम बुद्ध नागवंशी थे। पाली भाषा में "नाग "का अर्थ " हाथी "होता है। अर्थात हाथी बुद्ध लोगो का प्रतिक चिह्न हैं।
इसलिए इस नए जन्मे बालक (सिद्धार्थ) को हाथी के स्वरुप में बताया गया है।
अर्थात, हाथी बुद्ध के जन्म का प्रतीक है और हाथी बौद्ध धर्म का भी प्रतीक है। इस सत्य को छुपाने के लिए, ब्राहमणों ने काल्पनिक पार्वती के काल्पनिक पुत्र को हाथी की गर्दन लगाई, किसी अन्य प्राणी जैसे शेर, बैल, घोडा, चूहा की गर्दन नहीं लगाई।
‼️अष्टविनायक का सत्य‼️
जगत में दुःख है, यह बात दुनिया में सबसे पहले बताने वाला बुद्ध ही था और दुःख को दूर कर सुखी होने के लिए अष्टांगिक मार्ग भी बुद्ध ने ही बताया।
"अष्टांगिक" मार्ग का अवलम्ब करने से दुःख नष्ट होता है। यह बुद्ध ने सिद्ध कर दिखाया। यह आठ नियम या सिद्धांत विनय से सम्बंधित है।
इसलिए, बुद्ध को 'विनायक' कहा गया और "आठ मार्गो" पर विनयशील होने से "अष्टविनायक " भी बुद्ध को ही कहा गया।
अषटांगिक मार्ग इस प्रकार है
1-सम्यक दृष्टि
2-सम्यक संकल्प
3-सम्यक वाणी
4-सम्यक क्रमांत
5-सम्यक आजीविका
6-सम्यक व्यायाम
7-सम्यक स्मृति
8-सम्यक समाधि
अर्थात, अष्टांगिक मार्ग से अष्टविनायक होकर दुःख को नष्ट कर सुख की प्राप्ति करवाने वाला बुद्ध था। इसलिए, बुद्ध को लोग 'सुखकर्ता और दुखहर्ता' कहने लगे।
इस सत्य को दबाने के लिए ब्राहमणों ने काल्पनिक गणपति को अष्टविनायक भी कहा और सुखकर्ता दुखहर्ता भी कहा।
इसका मतलब यह है की, गणपति दूसरा तीसरा कोई नहीं है,
बल्कि, तथागत बुद्ध ही गणपति है। ब्राहमणों ने बुद्ध अस्तित्व को नष्ट करने के लिए काल्पनिक गणपति का निर्माण किया।
बौद्ध-ग्रंथों का ब्राह्मणीकरण करते समय ,उन्होंने कई गलतियां की, जिससे ब्राह्मणों की बदमाशी उजागर होती है।
वे गलतियां इस प्रकार है
शिव शंकर जब देवों का देव है, तो उन्हें गणपति का सर धड से अलग करते समय उन्हें, यह पता क्यों नहीं चला कि वह उसका ही पुत्र है?
जब गणपति देव था, तो उसे यह कैसे पता नहीं चला की, जिसे वह रोक रहा है वह उसका ही बाप है?
शंकर को यह कैसे पता नहीं चला की, बिना उसकी अनुपस्थिति में उसकी बीवी गर्भवती कैसे हो गयी, जब्कि वह नौकरों की सुरक्षा में थी।
अगर पार्वती शरीर के मैल से बालक बना सकती है, तो वह उसी मैल से बालक का सिर क्यों नही बना पाई? खैर ये कहें की पार्वती नहा कर आई थी।लेकिन, जीवन मृत्यु का शाप वरदान देने वाले शंकर की शक्ति कहाँ गई थी ? शंकर ने एक निष्पाप हाथी की जान क्यों ली ?सोचे की क्या किसी छोटे से (बालक) की गर्दन में हाथी का सिर फिट कैसे बैठ गया ?
ए सिर्फ काल्पनिक कहानी ही हो सकती है सच्चाई नहीं।
🔺लक्ष्मी कौन?? 🔺
जैसा कि आप जानते हैं लक्ष्मी का दूसरा नाम माया है और माया शब्द कहाँ से आया??
तथागत गौतमबुद्ध की मां का नाम महामाया था ब्राह्मणों ने बड़ी चतुराई से महामाया को ही माया अर्थात लक्ष्मी नाम देकर धन की देवी बना दिया और पूजा पाठ हवन पाखंड करके अपनी कमाई का जरिया बना दिया है।
प्रियदर्शी सम्राट 84000 बौद्ध विहारों बनवाने के बाद सभी 84000 बौद्ध विहारों में दीपक जलावाकर और पूरे देश को सजा कर उत्सव मनाया था जिसे दीपदान उत्सव के नाम से जाना जाता था उस दिन एक दूसरे को उपहार देते थे और गरीबों की मदद करते थे।
रात के समय मैं तथागत गौतमबुद्ध और उनकी माता महामाया की मूर्ति रख कर वंदना करते थे जिसे ब्राह्मणों ने बड़ी चतुराई से बुद्ध को गणेश और महामाया को ही लक्ष्मी बना कर लोगों को बेवक़ूफ़ बना दिया। आप खुद फैसला करें जब लंका से वापस राम लक्षमण और सीता आती है तो पूजा राम लक्षमण और सीता की होनी चाहिए थी गणेश और लक्ष्मी क्यों???
मौर्य वंश का इतिहास पढ़ना और लिखना बहुत मुश्किल है इतना बड़ा था हमारा हमने इतिहास को अपने तर्क शक्ति के आधार पर ढूढ कर सत्य को पूरी दुनिया के सामने लाने की कोशिश की है इसको सत्य या झूठ मानना आपके विवेक पर निर्भर है।
ईसीलिए सिंबल आफ नालेज बोधिसत्व भारत रत्न 💎 भारतीय संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ आंबेडकर ने 22 सालों तक सभी धर्मो के गहन अध्ययन के बाद पाया कि बुद्ध धम्म ही बैज्ञानिक सिद्धांत पर आधारित धर्म है और बुद्ध धम्म से सभी मनुष्य का कल्याण हो सकता है इसलिए ही बाबा साहब डॉ आंबेडकर ने खुद बौद्ध धम्म ग्रहण किया और और पूरी दुनिया को बुद्ध धम्म अपनाने का आदेश दिया था।
जो मूर्ख ब्राह्मणी वायरस से पीड़ित हैं और बुद्ध धम्म को समझना नहीं चाहते हैं सवर्णों द्वारा अपने मार खाने या अपमानित होने का इंतजार कर रहे हैं।और ब्राह्मणों से नीच बन कर ब्राह्मणों की गुलामी करेंगे और अपनी आने वाली पीढ़ी को भी ब्राह्मणों का गुलाम बना कर जायेंगे ।
सभी देश वासियों के हित में है कि जल्द से जल्द बौद्ध बनो 🙏
अपना सर नेम बौद्ध लिखें और धर्म के स्थान पर बुद्ध धम्म लिखें। और ब्राह्मणो द्वारा निर्मित फर्जी भगवानों और देवी देवताओं को फेंक कर अपने घरों में सिर्फ तथागत गौतमबुद्ध, सम्राट अशोक और बाबा साहब डॉ आंबेडकर की मूर्तियां या तस्वीर ही लगायें और बहुजन महापुरुषों के तस्वीर ही लगायें। हिंदू धर्म के त्योहारों और पूजा पाठ हवन पाखंड को छोड़ कर बौद्धो के महोत्सव और उत्सव 💃 ही मनायें।
जय भीम 💪
नमो बुद्धाय 🙏
जय भारत 🙏
जय संविधान 🙏
बौद्ध आचार्य डॉ एस एन बौद्ध 9953177126 ✍️
देश वासियों को ब्राह्मणों की गुलामी से निकालने के लिए
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