#वैश्या_का_दर्द. वेश्यावृत्ति शब्द #संस्कृत (संज्ञा स्त्रीलिंग) किसी स्त्री का धन या लाभ पाने के लिए शारीरिक व्यवसाय करना धन लेकर पुरुषों से संभोग करना।
#वैश्या_का_दर्द
वेश्यावृत्ति शब्द #संस्कृत (संज्ञा स्त्रीलिंग) किसी स्त्री का धन या लाभ पाने के लिए शारीरिक व्यवसाय करना धन लेकर पुरुषों से संभोग करना।
2. वैश्या का व्यवसाय वेश्यावृत्ति
वैश्या की रोजी रंडी की आजीविका को कहते हैं।
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पहले लोग कहते थे कि इज्जत लडकी का गहना होता है. और यह सच भी है इज्जत महिला का गहना होता है हम सभी इस बात को अपने परिवार के लिए लागू करते हैं लेकिन आखिर यह भावना और मनोदशा तब कहां होती है जब हम किसी वेश्या के साथ सोते हैं. तब हम उस महिला की इज्जत उतारने से बिलकुल भी परहेज नहीं करते, तब यह ख्याल क्यों नही आता कि वह किसी की बेटी है, बहू है, माँ है, बहन है।
एक लडकी जिसकी उम्र तकरीबन 16 साल होगी वह एक पुलिस रेड में पकडी गई थी. पूछताछ के दौरान उसने बताया कि उसे उसके गांव से एक युवक शादी के बहाने भगा कर लाया था और इस दलदल में फंसा दिया ऐसी कई और कहानियां हैं जिसमें लड़कियों को बहला-फुसला कर या गरीबी का वास्ता देकर इस व्यापार में धकेला जाता है।
#वेश्यावृत्ति (लैटिन prostitutio - भ्रष्टता, अपमान, अपवित्रता लाना), एक शुल्क के लिए ग्राहकों की आवश्यकताओं जैसे यौन संतुष्टि के लिए शरीर को बेचना है जिससे एक महिला को आजीविका कमाने का मौका मिले. प्राचीन काल से ज्ञात वेश्यावृत्ति का मतलब है कि आप किसी महिला के साथ यौन संबंध बनाने के बाद उसका भुगतान पैसों से करें. यह धरती का सबसे पुराना व्यवसाय है. वेश्यावृत्ति जिसकी उपस्थिति प्राचीन युग से है समाज में मान्य और अमान्य दोनों के तराजू पर बराबर है. यह एक तरह का व्यापार है जिसमें देह और इज्जत दोनों की नीलामी होती है. वेश्यावृति में न सिर्फ महिला के देह का सौदा होता है बल्कि उसकी मर्यादा को भी बेच दिया जाता है. अब ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर हम इसे मान्यता देते ही क्यों हैं और किन हालातों में यह समाज में उत्पन्न हुआ?
#आखिर_क्यों_दें_इस_घृणित_व्यवसाय_को_मान्यता
अभी हाल ही में दिल्ली के एक संत पकड़े गए जो लडकियों से वेश्यावृत्ति कराते थे और उसमें से कइयों को वह जबरदस्ती इस दलदल में लेकर आए थे. पंजाब की सोनू पंजाबन के बारे में भी सभी जानते हैं जिसके गिरोह में ऐसी लडकियां थीं जिन्हें शहर के युवक गांवों से शादी और काम का लालच दे बेच देते थे और वह उनसे देह व्यापार कराती थी।
#जरा_सोच_कर_देखिए_कि_आपकी_बेटी_बहू_या_मां_को_कोई_जबरदस्ती_उठा_कर_ले_जाए_और_उनसे_देह_व्यापार_कराए।
सोचने मात्र से ही आपकी रुह कांप उठी है ना! अब ऐसे में क्या आप इसे मान्यता देना चाहेंगे. क्या आप चाहेंगे कि आपकी इज्जत भी चंद कौड़ियों के भाव बेच दी जाए।
नहीं न, तो क्यों ऐसी मांग उठी कि इसे कानूनी मान्यता मिले. सरकार इन दिनों ऐसे कई कानूनों पर विचार कर रही है जो हमारी पूर्ण स्वंतत्रता में बाधक हैं जैसे गे-कानून, सरोगेसी कानून, तलाक कानून आदि. अब ऐसे में समाज का एक बुद्धिजीवी वर्ग यह आवाज उठा रहा है कि इसे कानूनी मान्यता दे देनी चाहिए. इसे अनैतिक विचार के सिवा और क्या कहेंगे।
#असली_उपाय_यह_हो_सकता_Iहै
क़ानूनी ढांचे में कुछ इस तरह संशोधन होना चाहिए कि इससे महिलाओं का शोषण बंद हो और उन्हें इस काम के लिए मजबूर न किया जा सके. इससे भी अधिक जरूरी है कि भारत की सामाजिक संरचना को नुक़सान न पहुंचे. सख्त नियंत्रण की दरकार इसलिए भी है, ताकि अवयस्क लड़कियों को इस काम के लिए मजबूर न किया जा सके।
यौनकर्मियों के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के लिए एक निश्चित प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए. साथ ही जब कोई इस पेशे में आए तो उसके पास स्वास्थ्य प्रमाणपत्र होना अनिवार्य हो. किसी दूसरी फर्म की तरह वेश्यालयों पर भी टैक्स लगना चाहिए और यौनकर्मियों की चिकित्सा व्यवस्था के लिए सरकार द्वारा एक निश्चित राशि भी तय होनी चाहिए।
#भूख_तो_कभी_नहीं_मिटेगी
असल बात तो यह है कि जितना खाना बढ़ेगा उतनी भूख भी बढ़ेगी. इसलिए इसे कानूनी मान्यता देते समय महिलाओं और बच्चों का सबसे ज्यादा ध्यान रखना होगा. कहीं ऐसा न हो कि दिखावे के चलते हमें भी पश्चिमी देशों की तरह नंगी सभ्यता वाला देश करार दिया जाए।
आपका भाई
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