एक दिन साहाब कांशीराम अपने रास्ते से जा रहे थे तभी उनका ध्यान गटर में पड़े चार कुत्तों के बच्चो पर गया जो गटर मे गिर गये थे। तभी साहाब मान्यवर कांशीराम जी ने चार में से दो कुत्तें के बच्चो को गटर से बाहर निकाला और अपने रास्ते पे चलते बने.
एक दिन साहाब कांशीराम अपने रास्ते से जा रहे थे तभी उनका ध्यान गटर में पड़े चार कुत्तों के बच्चो पर गया जो गटर मे गिर गये थे। तभी साहाब मान्यवर कांशीराम जी ने चार में से दो कुत्तें के बच्चो को गटर से बाहर निकाला और अपने रास्ते पे चलते बने. तभी यह वाकिया साहब के कुछ अनुयायीयो ने देखा तो वो साहाब को बोले की-
साहब आपने सिर्फ दो कुत्ते के बच्चो को बाहर निकाला लेकिन दो कुत्ते के बच्चे अभी भी गटर मे पड़े है उनको आपने क्यों नहीं निकाला ? तब साहब बोले की ; चार कुत्ते के बच्चो में से दो बच्चे बाहर निकलना चाहते थे मैंने उनको थोड़ा पुश किया और वो बाहर निकल गये। लेकिन ... दो बच्चे वही पर सुस्ता रहे थे.. (slavers enjoy slavery ) और अगर मैंने उन दो सुस्ता रहे कुत्तों के बच्चो को बाहर निकालाता तो वो मुझे ही गालिया देते । इसलिए जो गटर से निकलना चाहते है मैं सिर्फ उन्हीं को ही बाहर निकाल सकता हुँ ।
जो नहीं निकलना चाहते उनके लिए मैं कुछ नहीं कर सकता. उनको गुलामी में मजा आ रहा है वो उनकी मौज है। मैं कुछ नहीं कर सकता.
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