मन्दिर मे दान या जजिया लगान।
मन्दिर मे दान या जजिया लगान।
प्रिय हिन्दु मित्रो दोनो के बारे मे विस्तार से समझ ले।
जजिया- ये एक तरह का लगान था जो मुस्लिम राजशाही गैर मुस्लिम पर लगाता था। यूं समझे कि मुस्लिम न होने कि सजा थी। जाहिर सी बात थी भारत मे भी हिन्दुओ पर भी जजिया लगा था। लेकिन मजे कि बात है ब्राह्मण कुछ समय बाद जजिया से अजाद हो गए थे। पहले, तो ये खुद को हिन्दु ना बताकर ब्राह्मण बताने लगे थे। दूसरा, जब भी हिन्दु अत्याचार या अधिकार के लिए एकजुट होकर हथियार उठाने जाते तभी ब्राह्मण धर्म के आका बनकर रोक देते थे। लड़ने के बजाय मन्दिर मे पूजा-पाठ करके भगवान को प्रसन्न करने बोलते थे। जिस से हिन्दु और भी धर्मभीरू और कमजोर हो गए है और वो आजतक है।
मन्दिर मे दान- मुसलमानो कि बादशाही गई, अंग्रेज आये गए, देश अजाद हुआ लेकिन हिन्दुओ पर अत्याचार और जजिया आज भी हिन्दुओ पर लग रहा है, बस नाम बदल गया है। मन्दिर के दान पात्र मे वहाँ के राज्य सरकार का नियंत्रण होता है। राज्य सरकार लगभग आधी दान राशि पुजारी को दे देती है जिस से पुजारी और भी लगन अपना काम करे और हिन्दुओ को और धर्म भीरू और कमजोर बनाए और राज्य सरकार कि मदद करे। संक्षेप मे बोलू तो हिन्दुओ के पतन के पीछे पुजारियो का अहम भुमिका है।
निवारण- यहूदियो से सीखिए कैसे जेरूसलेम के मन्दिरो मे सर पटकने वाले आज विज्ञान का रास्ता पकड़ा है। कैसे अलग अलग 26 कबीले मे बटे यहुदी एकजुट हो गए कि दो यहुदी कभी दोस्त नही हो सकते क्योकि भाई हो जाते है। यहा हमारे आकाओ ने हिन्दु मुस्लिम भाई भाई तो बहुत सिखाए है। लेकिन यही आका किसी हिन्दु को भाई बनाने से पहले जात गोत्र वर्ण देखना सिखाते है। स्त्री को सम्मान नही समान अधिकार दो ना ज्यादा ना कम ताकी जरूरत पड़े तो पर परूष के समान लड़ सके।
और सबसे महत्वपूर्ण बात अपने धन को पूजा-पाठ, धार्मिक चंदा और धार्मिक अनुष्ठानो मे ना गवाएं। धन को खुद के लिए खर्च करे अगर बच जाए तो किसी जरूरतमंद हिन्दुओ पर खर्च करे पूरे भारत के कल्याण का ठीकरा अकेले हिन्दु लेकर नही रखा है फिर भी बच जाए तो दो चार और पैदा कर लो क्योकि Size does matters विश्वगुरु बनने के चक्कर मे पाश्चात्यी फेरे मे मत पढ़िए।
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