क्या थी सती प्रथा?

क्या थी सती प्रथा?

यह एक ऐसी प्रथा थी जिसमें पति की मौत होने पर पति की चिता के साथ ही उसकी विधवा को भी जला दिया जाता था। कई बार तो इसके लिए विधवा की रजामंदी होती थी तो कभी-कभी उनको ऐसा करने के लिए जबरन मजबूर किया जाता था। पति की चिता के साथ जलने वाली महिला को सती कहा जाता था जिसका मतलब होता है पवित्र महिला।

मुगलों के शासनकाल में सबसे पहले हुमायूं ने इस प्रथा पर रोक के लिए कोशिश की। उसके बाद अकबर ने सती प्रथा पर रोक लगाने का आदेश दिया। चूंकि महिलाएं स्वेच्छा से भी ऐसा करती थीं, इसलिए उन्होंने यह भी आदेश दिया कि कोई भी महिला अपने मुख्य पुलिस अधिकारी से विशिष्ट अनुमति लिए बगैर ऐसा नहीं करती हैं।

यूरोपीय औपनिवेशिक शासन में रोक:

18वीं सदी के अंत तक इस प्रथा को ऐसे कुछ इलाकों में बंद कर दिया गया जहां यूरोपीय औपनिवेशिक शासन था। पुर्तगालियों ने 1515 तक गोवा में इस प्रथा पर रोक लगा दी थी। डच और फ्रेंच ने इसे हुगली चुनचुरा और पुड्डूचेरी में बंद किया।

राजा राम मोहन राय और वह घटना:

राजा राम मोहन राय किसी काम से विदेश गए थे और इसी बीच उनके भाई की मौत हो गई। उनके भाई की मौत के बाद सती प्रथा के नाम पर उनकी भाभी को जिंदा जला दिया गया। इस घटना से वह काफी आहत हुए और ठान लिया कि जैसा उनकी भाभी के साथ हुआ, वैसा अब किसी और महिला के साथ नहीं होने देंगे।

तत्कालीन ब्रिटिश भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक द्वारा 4 दिसंबर, 1829 को बंगाल सती रेग्युलेशन पास किया गया था। इस कानून के माध्यम से पूरे ब्रिटिश भारत में सती प्रथा पर रोक लगा दी गई।
Copy from Siddhartha

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