डाक्टर राम मनोहर लोहिया अपनी किताब, “हिन्दू बनाम हिन्दू” में लिखते हैं
डाक्टर राम मनोहर लोहिया अपनी किताब, “हिन्दू बनाम हिन्दू” में लिखते हैं
कि हम प्राचीन काल की चाहे जितनी भी डींग हांक लें, लेकिन अगर अँग्रेजों का सम्पर्क न हुआ होता, तो हम बहुत पिछड़े रहते.
भारतीय इतिहास के पांच हजार सालों में एक भी विद्वान शूद्रों में न हो सका,
जबकि अँग्रेजों के लगभग 200 साल के गुलामी काल में डाक्टर अम्बेडकर, मेघनाथ साहा, राधा विनोद पाल, सुरेन्द्र नाथ शील और अन्य कितने ही नाम जिन्हें मैं नहीं जानता, शूद्रों ने पैदा किये हैं.
यदि 1857 का विद्रोह सफल हो जाता तो निश्चय ही शूद्रों को सामाजिक उत्थान के इतने अवसर न मिलते,
जितने की 1857 के बाद अंग्रेजों की गुलामी काल में मिले हैं.
यह अंग्रेजों की गुलामी का काल था,
जब एक ब्राह्मण चपरासी बना तथा चमार एक कलक्टर.”
इसलिये इस देश का मूल शासक ये खूब जानता है कि अगर अंग्रेज 20- 30 साल और रह गये होते तो देश का शूद्र फ़िर से देश का मूल शासक बन गया होता।
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