बोधिसत्व बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी के सम्मान में कुछ चंद पंक्तियां 🙏🏻🌷
बोधिसत्व बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी के सम्मान में कुछ चंद पंक्तियां 🙏🏻🌷
जब सन् 1927 में बाबा साहेब कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने गये,
तो उन्होंने वहां देखा कि कोलंबिया यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी की दीवार पर दो लाइनें लिखी हुई हैं
"आम आदमी पैदा होता है और मर जाता है,
महापुरुष पैदा होता है जो कभी नहीं मरता "
यह सब देखकर बाबासाहेब ने #नीचे_वाली_लाइन को काली स्याही से काट दिया और वहां से चले गये।
उसके बाद पूरी यूनिवर्सिटी में हंगामा मच गया,
प्रसाशन की तरफ से उन्हें नोटिश दे दिया गया कि कल 12 बजे तक आप अपना स्पष्टीकरण दें,
यदि स्पष्टीकरण गलत पाया गया तो आपको यूनिवर्सिटी से निकाल दिया जायेगा।
दूसरे दिन पूरा हॉल खचा-खच भरा रहा,
वहां के सभी छात्रों में यह जानने की जिज्ञासा बहुत ज्यादा थी
कि बाबा साहेब क्या स्पष्टीकरण देते हैं।
बाबा साहेब आये और पूरे कॉन्फिडेंस के साथ उन्होंने अपने स्पष्टीकरण में कहा,
कि ऊपर की लाइन बिल्कुल सही है कि "आम आदमी पैदा होता है और मर जाता है"
लेकिन दूसरी लाइन "महापुरुष पैदा होता है जो कभी नहीं मरता" से मैं सहमत नहीं हूँ।
उन्होंने आगे कहा कि
" #यदि_कोई_महापुरुष_पैदा_होता_है, #और_यदि_उसके_विचारों_को_नष्ट_कर_दिया_जाये #तो_वह_भी_मर_जाता_है"
बाबा साहेब का स्पष्टीकरण सुनकर पूरा हाल तालियों से गड़गड़ाने लगा।
हाँ,
यदि महापुरुष की विचार-धारा नष्ट कर दी जाये तो महापुरुष की मृत्यु हो जाती है।
जैसे भारत में जिस दिन तथागत गौतम बुद्ध की विचार-धारा को नष्ट कर दिया गया,उसी दिन उनकी मृत्यु हो गयी थी।
और बाबा साहेब के इस स्पष्टीकरण के बाद उस प्रथम लाइन के नीचे "वही लाइन" लिख दी गयी ,
जो बाबा साहेब ने अपने स्पष्टीकरण में कही थी।
यही कारण है कि बाबा साहेब को आज पूरा विश्व
"ज्ञान का प्रतीक" (#Symbol_Of_Knowledge) मानता है।
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