" #मंगल_कर्म " तथागत बुद्ध ने 38 प्रकार के "मंगल कर्म" बताये है जो "महा मंगलसुत्त" के नाम से जाना जाते है—
" #मंगल_कर्म "
तथागत बुद्ध ने 38 प्रकार के "मंगल कर्म" बताये है जो "महा मंगलसुत्त" के नाम से जाना जाते है—
1 मूर्खों की संगति ना करना ।।
2 बुद्धिमानों की संगति करना ॥
3 शीलवानो की संगति करना ॥
4 अनुकूल स्थानों में निवास करना ॥
5 कुशल कर्मों का संचय करना ॥
6 कुशल कर्मों में लग जाना ॥
7 अधिकतम ज्ञान का संचय करना ॥
8 तकनीकी विद्या अर्थात शिल्प सीखना ॥
9 व्यवहार कुशल एवं विनम्र होना ॥
10 विवेकवान होना ॥
11 सुंदर वक्ता होना ॥
12 माता पिता की सेवा करना ॥
13 पुत्र-पुत्री-स्त्री का पालन पोषण करना ।।
14 अकुशल कर्मों को ना करना ॥
15 बिना किसी अपेक्षा के दान देना ॥
16 धम्म का आचरण करना ॥
17 सगे-सम्बंधियों का आदर सत्कार करना
18 कल्याणकारी कार्य करना ॥
19 मन, शरीर तथा वचन से परपीड़क कार्य ना करना ॥
20 नशीली पदार्थों का सेवन ना करना ॥
21 धम्म के कार्यों में तत्पर रहना ॥
22 गौरवशाली व्यक्तित्व बनाए रखना ॥
23 विनम्रता बनाए रखना ॥
24 पूर्ण रूप से संतुष्ट होना अर्थात तृप्त होना ॥
25 कृतज्ञता कायम रखना ॥
26 समय समय पर धम्म चर्चा करना ।।
27 क्षमाशील होना ॥
28 आज्ञाकारी होना ॥
29 भिक्षुओ, शीलवान लोगों का दर्शन करना ।।
30 मन को एकाग्र करना ।।
31 मन को निर्मल करना ।।
32 सतत जागरूकता बनाए रखना ।।
33 पाँच शीलों का पालन करना ॥
34 चार अरिय सत्यों का दर्शन करना ।।
35 अरिय अष्टांगिक मार्ग पर चलना ॥
36 निर्वाण का साक्षात्कार करना ॥
37 शोक रहित, निर्मल एवम निर्भय होना ॥
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