❓आरक्षण पर दुबे जी की सलाह❓【संडे मेल, 30 सितंबर 1990】‼️ #मुद्रा_राक्षस‼️दुबे जी बोले, त्रिवेदी जी कहाँ हैं❓

❓आरक्षण पर दुबे जी की सलाह❓
【संडे मेल, 30 सितंबर 1990】
‼️ #मुद्रा_राक्षस‼️

दुबे जी बोले, त्रिवेदी जी कहाँ हैं❓

चौबे जी बोले, त्रिवेदी जी शुक्ला जी के पास हैं और मिश्रा जी का मामला निपटा रहे हैं, मिश्रा जी ने बारे में शुक्ला जी ने पाठक जी को फोन किया था, पाठक जी ने शर्मा जी को बुलाया, शर्मा जी ने वहीं के वहीं उपाध्याय जी को बोल दिया❗

मामला झा साहब के बेटे का है, बेटे के बारे में भरद्वाज जी ने त्रिपाठी जी को कह दिया था! बेटा बहुंत योग्य है, रामरतन जोशी जी ने पर्चा आउट करा दिया था इसलिए तीसरी श्रेणी में इंटर पास हो गया था❗

 इसके बाद चतुर्वेदी जी ने दो लाख केपीटेशन फीस लेकर एम.बी.बी.एस.कराया है, इम्तिहान में द्विवेदी जी ने बहुंत मदद की, समस्या यह है कि एक हरिजन एम.डी.की डिग्री लिए खड़ा है और एक पिछड़ा वर्ग का उम्मीदवार के पास एम.डी.,डी.एस. सी.की डिग्री है❗

पद रिक्त कोटे का है!! ये साला हरिजनवा या कुम्हार की औलाद आ गया तो, चिकित्सा क्या करेगा, मरीजों की तो जान ले लेगा!!अब देखना यह है कि यह पद किसी तरह आरक्षण से मुक्त हो जाए तो साहब के योग्य बेटे की नियुक्ति हो जाए❗

समस्या यह है कि एम.डी.व एम.डी.डी.एस.सी.की डिग्रियां लिए अयोग्य उम्मीदवार आरक्षण के बल पर नौकरी में घुसना चाहते हैं❓

यह भी ध्यान देने की बात है कि दुबे, शुक्ला, त्रिवेदी, चतुर्वेदीगणों के होते हुए झा साहब का बेटा रह जाए तो शर्म की बात है!!बीस हजार में पर्ची आउट कराने और दो लाख में एम.बी.बी.एस.होने का लाभ ही क्या रहा भाई❓

दुबे जी बोले, त्रिवेदी जी कहाँ हैं?लानत है हम सबको❗

दुबे जी बहुंत दुखी हैं, त्रिवेदी जी भी उदास हैं, चौबे जी गुस्से से उछल रहे हैं कि गजब हो गया साहब कि चमार, भंगी भी आई.ए.एस.हो रहे हैं!!और ये पिछड़े वर्ग वाले भी नौकरी में घुस रहे हैं!!अफसर बन रहे हैं, लो इनकी सुनो❗

अरे भाई कितना अच्छा लगता है कि कोई जूते गांठ रहा है, कोई पाखाना साफ कर रहा है!!परोपकार का काम है भाई, करते रहो, कोई टोकरी बना रहा है, कोई रस्सी बट रहा है, कोई बकरियां चरा रहा है‼️

कैसा उम्दा काम है, सेवा की सेवा धंधा का धंधा!!हम बेचारों को बम्हनई, ठकुराई में अब धरा ही क्या है?किसी प्रकार से आई. ए.एस हो गए!!चाकरी करते हैं❗
०००क्रमशः०००

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