1946 में यूनाइटेड नेशंस ने मानवाधिकार संगठन का गठन किया और सभी देशों से मांग की वे अपने यहां राष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार आयोग बनाएं.
1946 में यूनाइटेड नेशंस ने मानवाधिकार संगठन का गठन किया और सभी देशों से मांग की वे अपने यहां राष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार आयोग बनाएं.
भारत को अपने यहां मानवाधिकार आयोग का गठन करने में 47 साल लग गए. 1993 में मानवाधिकार आयोग का गठन किया गया. जबकि पाकिस्तान 1987 में अपने यहां मानवाधिकार आयोग बना चुका था.
भारत में मानवाधिकार आयोग के प्रमुख के पद हमेशा सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज को बिठाया जाता है. मानवाधिकार आयोग का पहला अध्यक्ष जज दीपक मिश्रा के पिता रंगनाथ मिश्रा को बनाया गया.
एक दो अपवाद को छोड़ दें तो मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष और उसके सदस्य ब्राह्मण होते हैं. मानवाधिकार आयोग में सबसे ज्यादा मामले SC ST के आतें हैं. और एक ही जाति के वर्चस्व के कारण मानवाधिकार आयोग कभी बेहतर प्रदर्शन नही कर पाया.
वर्तमान मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष रिटायर्ड जज अरुण मिश्रा भी मानवाधिकार की रक्षा में अयोग्य अकुशल क्यों हैं ?
1) पिछले साल रामजन्म भूमि के समतलीकरण के दौरान बौद्ध धर्म से जुड़े हुए प्राचीन अवशेष मिले. जैसे असोक चक्र कमल का फूल. इन प्राचीन कला कृतियों की सुरक्षा करने की मांग हेतु दो बौद्ध भिक्षुओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की.
जज अरुण मिश्रा ने भड़कते हुए ना सिर्फ याचिका को खारिज किया बल्कि तुच्छ बेकार बताकर याचिकाकर्ताओं पर एक एक लाख का जुर्माना लगाया. याद है न इसी जज ने वकील प्रशांत भूषण पर एक रुपया का जुर्माना लगाया था.
2) दिल्ली में रेलवे लाइन किनारे रह रहे 48,000 परिवार के घरों पर बुलडोज़र चलाने का आदेश जारी किया.
3) जज रहते हुए दिल्ली के संत रविदास मंदिर बचाओ अभियान को कुचलने की भरपूर कोशिश की.
4) आदिवासियों को उनके जल जंगल जमीन से बेदखल करने का आदेश पारित किया.
5) सुप्रीम कोर्ट का जज रहते हुए हमेशा आरक्षण विरोधी फैसला दिया. SC ST में क्रीमी लेयर लगाकर सीटें खाली रखने की साज़िश की.
6) इस जज के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने कहा इसके कारण लोकतंत्र खतरे में है.
7) जज लोया के हत्यारों को बचाने की कोशिश की. हंगामा खड़ा होने के बाद खुद को लोया केस की सुनवाई से अलग किया.
8) अडानी पावर कारपोरेशन के पक्ष में फैसला दिया. जिससे अडानी को 8000 करोड़ का लाभ मिल.
9) सुप्रीम कोर्ट का जज रहने के दौरान अडानी से जुड़ा हर केस इन्ही को मिलता.
10) मिश्रा औसत दर्जे का वकील था. कभी जज की परीक्षा पास नही की. वाजपेयी सरकार के दौरान वकील से उठाकर सीधे हाई कोर्ट का जज बना दिया गया. 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के दौरान फिर बिना किसी परीक्षा के सुप्रीम कोर्ट का जज बना दिया गया.
दिल पर हाथ रख कहिए क्या अरुण मिश्रा मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष बनने योगय है. क्या वह ईमानदारी से SC ST के मानवाधिकारों की रक्षा करेगा ?
अरुण मिश्रा कॉरपोरेट घरानों और बीजेपी का आदमी है. जनेऊ और बीजेपी सरकार की रक्षा हेतु वह मानवाधिकार हनन की उठने वाली हर आवाज़ को कुचल देगा. मानवाधिकार के रक्षा के लिए अरुण मिश्रा को हटाना जरूरी है.
✍🏼✍🏼Kranti Kumar
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