1933 में नाज़ी पार्टी जर्मनी की सत्ता पर काबिज हो गयी और एडोल्फ हिटलर बने जर्मनी के तानाशाह !
1933 में नाज़ी पार्टी जर्मनी की सत्ता पर काबिज हो गयी और एडोल्फ हिटलर बने जर्मनी के तानाशाह !
नाज़ी पार्टी चाहती थी जर्मन नागरिक नाज़ी विचारधारा में यकीन करें और तानाशाही सरकार का समर्थन करें !
नाज़ी पार्टी को पूरे जर्मनी का "ARYANIZATION" करना था. इसके लिए देश के सारे अखबारों, मैगज़ीन, किताब, कला, थिएटर, संगीत, फ़िल्म और रेडियो को नियंत्रित करने लिए नए कानून बनाए गए !
नाज़ी पार्टी ने पहला प्रहार मीडिया पर किया. स्वतंत्र विचारों के खबरों के आदान प्रदान संचार माध्यमों पर अंकुश लगाना था. "न्यू एडिटर एक्ट" पास किया गया जिसमें गैर जर्मन लोगों को एडिटर या पत्रकार बनने पर प्रतिबंध लगा दिया गया !
नए कानून में साफ लिखा था शुद्ध नस्ल का आर्य जर्मन नागरिक ही अखबारों और मैगज़ीन का एडिटर और पत्रकार बन सकते हैं. 1933 में जर्मनी में सबसे बड़े अखबार और मैगज़ीन का मालिक दो यहूदी थे, उल्सटेन परिवार और रुडोल्फ मोसेस !
नाज़ी पार्टी ने दोनों से जबरन उनके अखबार और संपत्ति का मालिकाना हक खरीद किया और उन्हें देश से निकाल दिया. इस तरह नाज़ी पार्टी ने अपनी विचारधारा का प्रचार करने के लिए पूरे मीडिया पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया !
भारत में BJP को "BRAMANIZATION" करने के लिए मीडिया, रेडियो या फ़िल्म जगत को नियंत्रित करने की कोई नियम कानून बनाने जरूरत नही पड़ी. BJP के सत्ता में आने से कई दशक पहले से मीडिया पर ब्राह्मण जाति का वर्चस्व है. वर्तमान में हर न्यूज़ चैनल का एंकर और अखबारों का एडिटर अधिकतर ब्राह्मण हैं या ठाकुर बनिया जैन !
अखबारों और न्यूज़ चैनलों में बड़े छोटे पदों पर कार्य करने वाले अधिकतर पत्रकार ब्राह्मण ठाकुर बनिया हैं. अगर किसी तरह कोई OBC SC ST इनके बीच पहुंच भी गया तो जातीय भेदभाव कर अपमानित कर संस्थान छोड़ने पर मजबूर कर देंगे !
ब्राह्मण ठाकुर बनिया एडिटर खुलकर BJP का साथ देते हैं और कुछ गिने चुने पत्रकार बीजेपी की आलोचना से ज्यादा उन दलों की आलोचना करते हैं जो BJP को हराने की ताकत रखते हैं !
मेनस्ट्रीम मीडिया पूरी तरह से BJP के पक्ष में खड़ा है. इसीलिए BJP सोशल मीडिया को नियंत्रित करने के लिए कानून बनाकर अंकुश लगाना चाहती है. सोशल मीडिया पर बहुजन समाज के कई ईमानदार पत्रकार सच्चाई से उन खबरों को दिखाते हैं जिन्हें मेनस्ट्रीम ब्राह्मण मीडिया छुपाता है !
सोशल मीडिया पर सबसे बड़ा नाम वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल सर का है. प्रो.रत्न लाल जी का अंबेडकरनामा, शंभु कुमार सिंह जी का नेशनल दस्तक, मीना कोतवाल जी का मूकनायक, सुमित चौहान जी का न्यूज़ बीक हो या अशोक दास जी का दलित दस्तक चैनल हो, इन न्यूज़ चैनलों और पत्रकारों ने अपनी ईमानदार पत्रकारिता के जरिए बहुजन समाज के दिलों में खास जगह बनाई है !
बहुजन समाज के पत्रकार, यूट्यूब पर उनके न्यूज़ चैनल और कई बेहतरीन यूट्यूबर्स ब्राह्मण न्यूज़ चैनल का विकल्प बन चुके हैं. BJP इन्हें पसंद नही करती, नए कानून के बहाने सोशल मीडिया पर बहुजन समाज की आवाज को कुचलना चाहती है !
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