1024AD मे गजनवी सोमनाथ टेंपल लुट गया, सवाल है की सोमनाथ टेंपल बुद्धिस्ट टेंपल था जैन टेंपल था या ब्राह्मणों का टेंपल था?
1024AD मे गजनवी सोमनाथ टेंपल लुट गया, सवाल है की सोमनाथ टेंपल बुद्धिस्ट टेंपल था जैन टेंपल था या ब्राह्मणों का टेंपल था?
गजनवी आखिर किस को लूट कर गया था?
इस सवाल का उत्तर बहुत ही आसान है लेकिन हमारे ब्राह्मणवादी इतिहासकारों ने इस सवाल को इतना टेढ़ा मेढ़ा किया है और जानबूझकर कर ब्राह्मणवादी खेमे में डाल दिया।
अगर आपको यह पता लगाना है कि किस सेंचुरी में किसी राज्य में या किसी जगह पर किसका मंदिर भव्य होगा, तो आपको वहां के शासक वर्ग का पता लगाना होगा उसके आगे पीछे के शासक वर्ग का पता लगाना होगा । क्योंकि भव्य मंदिर बिना शासक वर्ग की सहमति से बिना शासक वर्ग के मदद से नहीं बनाई जा सकती है।
अगर इतना आप पता लगा लेते हैं तो आपका काम आसान हो जाएगा यह जानना कि वह टेंपल मंदिर या विहार किसका था?
भारत में अगर मंदिरों का इतिहास पता करें तो यह पिछले 1000 साल मे ही इसका अस्तित्व दिखता है। उससे जो पुराने मंदिर बताये जाते हैं वह बेसीकली महाविहार हैं बौद्ध विहार हैं और छोटे-छोटे बौद्ध मठ है जिन्हें आजकल ब्रह्मणवादी खेमे में डालकर गुप्तकाल का पुराना मंदिर बता दिया जाता है।
सोमनाथ मंदिर सौराष्ट्र यानी आज के गुजरात में समुद्र किनारे बना हुआ था, वहां पर सक शासको का, तथा पह्ललव और कुसान शाशकों का भी प्रभाव रहा, ये तीनो की ईसा पूर्व से लेकर ईस्वी बाद तक शासन मे रहे और यह बुध मार्गी थे यही कारण है कि आईआईटी गांधीनगर ने यह साबित किया है की आज का जो सोमनाथ मंदिर है उसके ठीक नीचे है कभी बौद्ध मठ हुआ करता था। यानी एक बात तो तय है कि सबसे पहले वहां पर बौद्ध मठ था।
तो फिर सवाल उठता है कि क्या गजनवी के समय में भी बौद्ध मठ ही था?
इसका सही उत्तर जानने के लिए आपको उस समय के तत्कालीन राजा का पता लगाना पड़ेगा राजवंश का पता लगाना पड़ेगा।Gaznavi के समय सौराष्ट का शाशक कौन था?
गजनवी के समय सौराष्ट्र में भीम प्रथम का शासन था जो चालुक्य वंश का था. चालुक्य वंश जैन शासक है यानी जैन मार्ग का पालन करते थे। जैन मार्ग के जो पुजारी होते थे वह बेहद ही अहिंसक होते थे वह तो कीड़े तक को नहीं मारते, और जब गजनवी आया तो भीम प्रथम वहां से भाग खड़ा हुआ। भीम प्रथम से पूर्व किसी भी ब्राह्मण वादी शासक का गुजरात में या सौराष्ट्र में शासन देखने को नहीं मिलता मिलेगा भी कहाँ से उनके कभी कोई शासक रहा हो तब तो मिलेगा। लेकिन बौद्ध शासको का सुनहरा इतिहास रहा है सौराष्ट्र मे, यानी कुल मिलाकर जो बौद्ध मठ था उसी को जैन टेंपल में कन्वर्ट किया गया, जिसे गजनवी लूट गया।
अब यह सोमनाथ टेम्पल का ट्रेस स्कंद पुराण में भी मिलता हैं, आप सोच रहे होंगे स्कंद पुराण तो ब्राह्मणों का है जिसमे 15वी सदी तक की बातें है तो फिर उससे भी पुराना कैसे हो सकता हैतो यहां भी आप गलत है, इसे 15 वीं सदी के बाद ब्राह्मणों ने संस्कृत में तथा देवनागरी लिपि मे लिखा है लेकिन उनसे पहले ही स्कंद पुराण को जैनियों ने लिख लिया था, यही नहीं ज्यातर पुराणों को जैनियों ने लिखा है इन्ही पुराणों का ब्राह्मणों ने मुस्लिम शासन काल और अंग्रेजों के शासन काल में अपना पुराण बना लिया मिर्च मशाला और अश्लीलता, व्यभिचार, हरामखोरी, बलत्कार, शोषण इत्यादि डाल के । डिटेल्स के लिए Science Journey पर video 149 देखे।
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