मोदी सरकार द्वारा गठित जस्टिस रोहिणी कमीशन ने कहा है कि 10 ओबीसी जातियों ने ओबीसी कोटे की एक चौथाई सीटें ले ली हैं। इन जातियों में उत्तर भारत की यादव, कुर्मी कुशवाहा (सैनी) और जाट (राज्य स्तर पर) शामिल है।
मोदी सरकार द्वारा गठित जस्टिस रोहिणी कमीशन ने कहा है कि 10 ओबीसी जातियों ने ओबीसी कोटे की एक चौथाई सीटें ले ली हैं। इन जातियों में उत्तर भारत की यादव, कुर्मी कुशवाहा (सैनी) और जाट (राज्य स्तर पर) शामिल है।
इन जातियों को अलग कटेगरी बनाकर सरकार उन्हें 5% आरक्षण देना चाहती है।
इसमें कुछ बड़ी बेईमानी है। जिन दस जातियों को ज़्यादा लाभान्वित बताया जा रहा है, क्या उनकी संख्या भी ज़्यादा नहीं है?
अगर इन जातियों की कुल संख्या ओबीसी जातियों की संख्या का एक चौथाई है तो? फिर उनके एक चौथाई सीट ले लेने में समस्या किसे है?
क्या उनकी कुल संख्या जाने बग़ैर उन्हें 5% पर समेट देना न्यायोचित होगा?
ओबीसी का अभी आधा कोटा भी भरा नहीं गया है। ऐसी स्थिति में क्या यह उचित नहीं होगा कि पहले कोटा भरा जाए और फिर कर्पूरी फ़ॉर्मूले के आधार पर उप-वर्गीकरण किया जाए।
बिना जाति जनगणना के न तो जातियों की संख्या पता चलेगी और न ही वैज्ञानिक आधार पर बँटवारा होगा।
जातियाँ एक दूसरे का सिर ज़रूर फोड़ लेंगी। बीजेपी यही चाहती है।
Comments