लोकतंत्र में नेता का सबसे बड़ा डर होता है उसका बदला जाना। इसलिए हर नेता अपना पब्लिक इमेज ऐसा बनाता है कि वो उस जगह का नेता बनने के लिए बेस्ट suited है।
लोकतंत्र में नेता का सबसे बड़ा डर होता है उसका बदला जाना। इसलिए हर नेता अपना पब्लिक इमेज ऐसा बनाता है कि वो उस जगह का नेता बनने के लिए बेस्ट suited है। इस इमेज को बनाने के लिए वो झूठ, डर, धर्म, जाति इत्यादि का इस्तेमाल करता है। पॉलिटिकल एक्टिविज्म करने वाले लोगों का सबसे बड़ा काम होता है, इस इमेज की असलियत को लोगों को दिखाना। अपोजिशन का काम होता है इस इमेज को न बनने देना।
लोकतांत्रिक समाज में लोग इन सब चीजों पर हमेशा नजर रखते हैं। अब हमारा समाज लोकतांत्रिक तो है नहीं। इसलिए पॉलिटिकल activists को लोगों से हमेशा जुड़े रखना होता है, ताकि लोग अपनी जाति, धर्म और डर से वोट देते समय ऊपर उठ सकें। हालांकि यह काम आसान नहीं होता। यहां लोग वोट देते समय चालाकी नहीं, वफादारी दिखाते हैं। जबकि होना उल्टा चाहिए। नेता पब्लिक के पैसे से हवेली बनाए घूम रहा होता है, परंतु लोग उसके प्रति वफादार बने रहते हैं। यहां लोगों पर लोकतांत्रिक व्यवस्था थोप तो दी गई है, लेकिन उन्हें इसके प्रति जागरूक नहीं किया गया है। प्लेटो का कथन है कि 'बिना शिक्षा के लोकतंत्र, भीडतंत्र बन जाता है।' मुझको भारत भीड़तंत्र से ज्यादा और कुछ नहीं लगता। इस भीड़तंत्र को बनाए रखने के लिए समाज की एक दो जातियां दिन रात लगी रहती हैं। ये जातियां भारत को भीडतंत्र इसलिए बनाए रखना चाहती हैं, क्योंकि उनको डर है कि अगर लोग शिक्षित हो गए और लोकतंत्र उनके जीने का आदर्श बन गया तो इन जातियों की सामाजिक, राजनीतिक सत्ता चली जायेगी।
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