बाबासाहेब की मूर्तिसे इन्हें डर क्यूँ ???♦️

♦️♦️बाबासाहेब की मूर्तिसे इन्हें डर क्यूँ ???♦️♦️
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सामान्यता अखबारों में यह समाचार पढ़ने को मिल जाता है कि किसी समूह के लोगों ने बाबा साहब की मूर्ति को तोड़ा। तो स्वतः सवाल उठता हैं कि बाबा साहब की मूर्ति से इतनी आपत्त्ति क्यों है कि वह बारबार तोड़ी जाती है। कभी उत्तरप्रदेश में, तो कभी मध्यप्रदेश में, तो कभी मुम्बई में, तो कभी देश के किसी हिस्से में बाबा साहब की प्रतिमा को तोड़ा जाता है। आखिर ऐसा क्या है इस मूर्ति में कि कुछ लोग अपने कई ज़रूरी ज़िम्मेदारियों को भूलकर सिर्फ मूर्ति तोड़ने और सौहार्द बिगाड़ने में लग जाते हैं। कुछ तो वजह है इस मूर्ति में जो यह लोगों को चुभती हैं।

 आखिर क्या हैं वे वजह ?

बाबा साहब की मूर्ति कोई मंदिर में लगी देवी-देवता की मूर्ति या मस्जिद में किसी की मज़ार तो नहीं है। न किसी चर्च की मूर्ति है, न किसी और धर्म की तरह इसमें कोई दैवीय शक्ति है। फिर भी कुछ तो खूबियां हैं बाबा साहब की मूर्ति में जो इसको सबसे अलग बनाती है :-

वजह ये हो सकती हैं :-

1. यह  मूर्ति प्रतिमा आपको अहसास कराती है कि आप भी इंसान हो

2. यह आपको जगाती है कि आप का जीवन जानवर के जीवन से बद्दतर नहीं है

3. यह आपको बताती है कि कोई दैवीय शक्ति ने या किसी जिन्न ने या किसी अवतार ने आपका कभी भला नही किया है

4. यह आपको बताती है कि शिक्षा पाकर अपनी बुद्धि का विकास करना ही आपका लक्ष्य है

5. यह आपको अहसास कराती है कि पढ़ों, लिखों और अपने देश और समाज के लिए इंसानियत के लिए कुछ अच्छा काम करों

6. यह आपको अहसास कराती है कि 4 दिन बकरी के तरह जीने से अच्छा है कि 1 दिन शेर की तरह जियों

7. यह हर व्यक्ति को जो इंसांन है, उसमें मानवता का प्रवाह करती है

8. यह आपको अहसास कराती है कि सदियों से आपको बेवकूफ बनाया जा रहा है और ये आपको प्रकाश की तरफ ले जाती है

9. यह आपको अहसास कराती है कि कोई आपका भला नहीं करेगा, सिवाय आपके अपने प्रयास और कठिन परिश्रम के

10. यह आपको अहसास कराती है कि समाज के हर अंतिम व्यक्ति तक विकास करना ही देश की ज़िम्मेदारी है

11. यह आपको अहसास कराती है कि आपके पूर्वज कोई कमज़ोर इंसान नहीं थे, बल्कि यहाँ के असली मूलनिवासी रहे हैं और जो कोरेगांव जैसा इतिहास तक रचे थे

12. यह आपको अहसास कराती है कि भारत का एकमात्र चक्रवर्ती राजा सम्राट अशोक भी मूलनिवासी था

अंत मे बस यही कहना है इन असामाजिक तत्वों से -

"गिरा ना पाओगे लाख चाहकर भी मेरी शख्सियत को
मेरा कारंवा मेरे चाहने वालो से चलता हैं
ना की नफरत करने वालो से "

जय भीम नमोबुद्धय ❤️❤️
#बोल85✊✊
#जयमूलनिवासी👏👏

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