बंगाल के कुलीन ब्राह्मणों में ये मान्यता थी कि अगर विधवा को ज़िंदा रहने दिया गया तो रक्त शुद्धता नष्ट हो जाएगी।
बंगाल के कुलीन ब्राह्मणों में ये मान्यता थी कि अगर विधवा को ज़िंदा रहने दिया गया तो रक्त शुद्धता नष्ट हो जाएगी। बाक़ी जातियों की तरह उनमें विधवा विवाह नहीं होता था। सती यानी ज़िंदा जलाकर सरप्लस विधवाओं का निपटारा होता था।
ब्राह्मण समाज सुधारक राम मोहन राय ने सती के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई। उन्हें कामयाबी भी मिली।
रक्त शुद्धता की ज़िद इतनी कि एक एक बूढ़ा कुलीन ब्राह्मण बीसियों लड़कियों से शादी कर लेता था। बूढ़े के मरते ही सारी लड़कियाँ विधवा। ब्राह्मणों में फैली बाल विवाह और बहुविवाह की इस कुरीति के ख़िलाफ़ भी राम मोहन राय ने आंदोलन किया।
महान ब्राह्मण समाज सुधारक राम मोहन राय को नमन।
ब्राह्मण कुलभूषण राम मोहन राय की जगह, आज के ब्राह्मण परशुराम को नायक मान रहे हैं। परशुराम से वे पता नहीं क्या सीखना चाहते हैं?
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