जब पढ़ना पूरा पढ़ना नही तो न पढ़ना*
*जब पढ़ना पूरा पढ़ना नही तो न पढ़ना*
क ख ग घ ङ
च छ ज झ ञ
ट ठ ड ढ ण
त थ द ध न
प फ ब भ म
य र ल व श ष स ह....
अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ.....
यह जो शब्द आप ऊपर
देख रहे हैं l
वह इंसान ने बनाया है l
और सबसे बड़ी बात
यह है कि,
इन सब शब्दों में से ही
भगवान को
भगवान का नाम दिया गया है l
जिसे सब भगवान बोलते हैं l
इससे यह साफ जाहिर
होता है कि,
भगवान ने अपना नाम
खुद नहीं रखा है l
भगवान जो नाम है वह
इंसान ने रखा है l
यहां तक कि भगवान धरती फाड़कर नहीं निकले हैं l
उनकी मूरत को भी इंसानों ने ही बनाया हैं l
भगवान नाम भी दिया है l
जो भी किया है सब इंसान ने किया है l
तो भगवान ने क्या किया है ?
कौन है भगवान ?
भगवान को हम कैसे माने कि वह भगवान है l
क्योंकि भगवान को बनाने वाले
और भगवान को नाम देने वाले तो इंसान हैं l
भगवान ने कुछ खुद से नहीं किया जो किया इंसान ने किया l
विज्ञान भगवान को नहीं मानता क्योंकि भगवान ने तो कुछ ऐसा किया ही जिससे वह माने
भगवान है l
देश भर में बहुत मंदिर है l
वहां पर हर तरह के
लोग आते हैं l
दूर-दूर से दर्शन करने के लिए
और अपनी इच्छा अनुसार 50/ 100 /200 /500 /1000/ 10000 चढ़ाकर कहते हैं l
मैंने इतना दान किया मैंने उतना दान किया,
क्या भगवान के नाम पर चढ़ाई गई रकम भगवान की जेब में जाती है ?
क्या भगवान ने कभी आप से कहा मेरे मंदिर में आइए ?
क्या भगवान ने आपसे कभी पैसे मांगे ?
क्या भगवान ने कभी आपसे
कहा मेरी पूजा करने मंदिर में आइए ?
क्या भगवान ने कहा....
मेरे लिए अगरबत्ती लेकर आना l मेरे लिए फूल लेकर आना मेरे l लिए पैसे लेकर आना l
मुझे पैसों की जरूरत है l
मैं आपसे नहीं
मैं सभी लोगों से पूछ रहा हूं l
क्या भगवान ने कभी किसी से ऐसी बात की है ?
क्या भगवान आज तक किसी से कुछ मांगा है ?
कहीं सुना है आपने ?
कहीं देखा है आज तक ?
बहुत लोग बोलते हैं l
मैंने मन्नत मांगी थी
मेरी मन्नत पूरी हो गई है l
मेरा यह काम हो गया
मेरा वह काम हो गया
मेरी यह मन्नत पूरी हो गई
मेरा काम हो गया है l
मैं आपसे पूछता हूं
जो आपका काम हो गया वो क्या भगवान खुदा आकर किया है ?
या फिर वह तुम्हारी मेहनत और तुम्हारी लगन से हुआ है ?
या फिर तुम्हारी कठिन परिश्रम से हुआ है तुम्हारा काम ?
भाइयों दुनिया आगे निकल
गई है l
अपने मन से
अपने अंदर से
भगवान नाम का जो डर है l
उसे निकालो l
बस हो गया बहुत हो गया
ब्राह्मणों की झूठी तस्वीर को मिटाओ l
जो सिर्फ उन्होंने अपने स्वार्थ के लिए बनाई है l
जागो साथियों जागो।
अंधविश्वास भगाओ अपने आप को बचाओ।
*देवताओं* ने सिर्फ राक्षसों
को ही हराया।
मुगलों और अंग्रेजों को क्यों नहीं हराया...?
महिषासुर को मार कर "दुर्गा", देवी कहलाई,
और बलात्कारियों को मार कर "फूलन देवी", डाकू क्यों कहलाई???
पहले तो धड़ाधड़ अवतार जन्म लेते थे !
शिक्षा का युग आते ही अवतारों की नसबंदी क्यूं हो गई ???
आस्था ही अंधविश्वास की जननी है।
आस्था मूत्र पिला रही है
और नारियल का शुद्ध पानी फिकवा रही है।
भारत दुनिया का इकलौता देश है जहाँ मिट्टी की मूर्ति को देवी कह कर कपड़ा पहनाया जाता है और जिन्दा औरत को नंगा करके घुमाया जाता है!
अफसोस इस बात का नहीं कि “धर्म” का धंधा हो रहा है,
बल्कि अफसोस तो इस बात का है कि पढ़ा लिखा भी अंधा हो रहा है....!!!
पिता जी का पता नहीं?
और माता जी की जय-जय, वाह रे अन्धभक्तों।
नौ दिन मिटटी की मुर्ति के लिए भूखे-नंगे रह लेंगें,
लेकिन जिस माँ ने नौ माह पेट में पाला उसके लिए भी कभी नौ दिन भूखे रह के दिखाओ????
*मानसिक गुलाम*
एडिसन ने बल्ब बनाया यह सारी दुनिया जानती है।
लेकिन ब्रह्मा ने दुनिया बनाई यह केवल भारत जानता है।
ई रांग नम्बर है।
महसूस किया है उस जलते हुए रावण का दुख,
जो सामने खड़ी भीड़ से बार- बार पूछ रहा है, आप में सेे राम कौन है????
अर्थ हमारे व्यर्थ हो रहे हैं, पापी पुतले अकड़ खड़े हैं।
काग़ज़ के रावण मत फूँकों, ज़िंदा रावण बहुत पड़े हैं।।
पूरी दुनिया में भारत एक ऐसा देश है जहाँ लहसुन, प्याज खाने से पाप लगता है।
दलाली, रिस्वत, हराम की कमाई खाने से पाप नहीं लगता।।
अगर यूपी और बिहार वालों ने मंदिर की जगह फैक्टरियां लगाने के लिये वोट किया होता, तो आज मार खाने गुजरात नहीं जाना पड़ता।
# दिमाग की बत्ती जलाओ...
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