आरक्षण दिवस या छत्रपति साहूजी महाराज स्मृति दिवस विशेष 💐👉 आरक्षण का इतिहास, आज़ादी से पहले 📜

आरक्षण दिवस या छत्रपति साहूजी महाराज स्मृति दिवस विशेष 💐

👉 आरक्षण का इतिहास, आज़ादी से पहले 📜

1-26 जुलाई 1902 को छत्रपति शाहूजी महाराज द्वारा कोल्हापुर रियासत में सर्वप्रथम 50% पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण (प्रतिनिधित्व) की शुरुआत की गई !
2-1935 में एस० सी० वर्ग के आरक्षण का प्राविधान किया गया !
3-आज़ादी के बाद एस० टी० वर्ग के आरक्षण की शुरुआत हुई ! 

आज़ादी के बाद आरक्षण के मामले में मंडल आयोग का गठन एवं सिलसिलेवार कार्यवाही 
1-20 दिसंबर 1978 को श्री मोरारजी देसाई द्वारा मंडल आयोग की घोषणा !
2-01 जनवरी 1979 को मंडल आयोग का गठन !
3-21 मार्च 1979 से मंडल आयोग का कार्य का प्रारंभ !
4-22 दिसंबर 1980 को मंडल आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी !
5-1982 में मंडल आयोग की रिपोर्ट संसद में पेश हुई !
6-07 अगस्त 1990 को श्री बी पी सिंह ने मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू करने की घोषणा की !
7-13 अगस्त 1990 मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू करने की अधिसूचना जारी हुई !
8-14 अगस्त 1990 को मंडल आयोग की अधिसूचना के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई !
9-25 सितंबर 1991 को श्री नरसिम्हा राव सरकार का 59.5 प्रतिशत आरक्षण सीमा रखने का फैसला !
10-30 अक्टूबर 1991 को मंडल आयोग का मामला सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की संविधान पीठ के हवाले हुआ !
11-16 नवंबर 1992 सुप्रीम कोर्ट ने मंडल आयोग की सिफारिश लागू करने को वैध ठहराया किंतु आरक्षण की अधिकतम सीमा 50% रखने का फैसला सुनाया !
12-08 सितंबर 1993 सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़े वर्गों का 27% आरक्षण लागू हुआ !
13-2006 से शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी का आरक्षण शुरू हुआ !
14-10 अप्रैल 2008 को सुप्रीम कोर्ट ने क्रीमी लेयर को आरक्षण से बाहर किया !
15-आरक्षण मामले में विभिन्न मा० विभिन्न हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के अनेक फैसलों के कारण वस्तुस्थिति अस्थिर !

दिलचस्प बात:
1-19 सितम्बर 1990 को एक छात्र राजीव गोस्वामी ने आत्मदाह का प्रथम प्रयास किया !
2-10 अक्तूबर 1991 को इंदौर के राजवाडा चौक पर एक छात्र शिवलाल यादव द्वारा आत्मदाह का प्रयास किया गया !
3-20 सितम्बर 1993 को छात्र राजीव गोस्वामी ने आत्मदाह का दूसरा प्रयास किया ! बाद में लम्बी बिमारी के बाद 24 फरवरी 2004 को उसका निधन हो गया !

आरक्षण के जनक छत्रपति शाहूजी महाराज को उनके परिनिर्वाण दिवस पर करोड़ों सलाम 🙏 💐

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)