एक_आदमी_और_उसकी_नाव....✍️✍️

948.   #एक_आदमी_और_उसकी_नाव....✍️✍️
जब एक आदमी ने अपने घर पर एक पेंटर को बुलाया और उससे कहा कि आप हमारी नाव को रंग दीजिए

तो पेंटर ने कहा ठीक है ,
आप हमारा महनताना दे दीजिए और कलर के पैसे भी दे दीजिए ,
हम कलर ले आएंगे और आपकी नाव को पेंट कर देंगे और हुआ भी ऐसा ही।
उस पेंटर ने नाव को लाल रंग से रंग दिया जैसा कि मालिक ने कहा था।

अगले ही दिन, 
नाव का मालिक पेंटर के घर पर पहुंचा और उसने एक बहुत बड़ी धनराशि का चेक पेंटर को दे दिया।

पेंटर यह सब देख कर भौंचक्का रह गया, 
और उसने पूछा- ये इतने पैसे किस बात के लिए हैं ,
आपने तो मेरा मेहनताना कल ही दे दिया था।

मालिक ने कहा - ये पेंट का पैसा नहीं है, 
बल्कि ये उस नाव में जो "छेद" था उसको रिपेयर करने का पैसा है !

पेंटर ने कहा - अरे साहब, 
वो तो एक छोटा सा छेद था, सो मैंने बंद कर दिया था।
उस छोटे से छेद के लिए इतना सारा पैसा...शायद ठीक नहीं है।

मालिक ने कहा - दोस्त तुम मेरी बात समझे नहीं ,
अच्छा मैं विस्तार से समझाता हूँ। 
जब मैंने तुमसे पेंट करने के लिए कहा तो जल्दबाजी में ,
मैं यह कहना भूल गया कि उस छेद को भी रिपेयर कर देना।

शायद तुम को यह पता नहीं होगा कि पेंट सूखने के बाद ,
मेरे दोनों बच्चे उस नाव को लेकर कल समुद्र में नौकायान के लिए निकल गए थे।

मैं उस वक़्त घर पर नहीं था, 
लेकिन जब लौट कर आया और अपनी पत्नी से यह सुना कि बच्चे नाव को लेकर नौकायन पर निकल गए हैं।

तो मैं बदहवास हो गया,
क्योंकि मुझे याद आया कि नाव में तो छेद है !

मैं गिरता पड़ता भागा उस तरफ जिधर मेरे प्यारे बच्चे गए थे। 
लेकिन जैसे ही मैंने अपने बच्चों को देखा कि वह सकुशल वापस आ रहे हैं।
तो अब मेरी ख़ुशी और प्रसन्नता का आलम तुम समझ सकते हो !

फिर मैंने उस छेद को चेक किया तो पता चला कि मुझे बिना बताये, 
तुम उसको रिपेयर कर चुके हो।
तो मेरे दोस्त उस महान कार्य के लिए ये पैसे भी बहुत थोड़े हैं।

मेरी इतनी औकात नहीं कि उस कार्य के बदले ,
मैं तुम्हे ठीक ठाक पैसे दे पाऊं।

#निष्कर्ष:- जीवन मे "#भलाई_का_कार्य" जब मौका लगे ,
हमेशा कर ही देना चाहिए, 
भले ही वह कार्य बहुत छोटा ही क्यों न हो ।

क्योंकि कभी कभी छोटा सा कार्य भी...किसी के लिए बहुत अमूल्य हो सकता है।

उन सभी मित्रों को धन्यवाद ,
जिन्होंने कभी किसी व्यक्ति की "जिंदगी की नाव" को रिपेयर किया हो।
हर व्यक्ति को इस बात के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए कि वह किसी की "जिंदगी की नाव" को रिपेयर कर सकें।

जरूरत एवं दुख की घड़ी में साथ देने वाला व्यक्ति ही आपका सच्चा हितैषी होता है और बाकी....सभी स्वार्थी।

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