*मातृ दिवस पर विशेष*

*मातृ दिवस पर विशेष*

एक शिशु का जब जन्म होता है, तो उसका पहला रिश्ता माँ से होता है। माँ शिशु को पूरे 9 माह अपनी कोख में रखने के बाद असहनीय पीड़ा सहते हुए उसे जन्म देती है और इस दुनिया में लाती है। इन नौ महीनों में शिशु और माँ के बीच एक अदृश्य प्यार भरा गहरा रिश्ता बन जाता है। यह रिश्ता शिशु के जन्म के बाद साकार होता है और जीवन पर्यन्त बना रहता है। माँ और बच्चे का रिश्ता इतना प्रगाढ़ और प्रेम से भरा होता है, कि बच्चे को जरा सी तकलीफ होने पर भी माँ बेचैन हो उठती है। वहीं तकलीफ के समय बच्चा भी माँ को ही याद करता है। माँ का दुलार और प्यार भरी पुचकार ही बच्चे के लिए दवा का कार्य करती है। इसलिए ही ममता और स्नेह के इस रिश्ते को संसार का खूबसूरत रिश्ता कहा जाता है। दुनिया का कोई भी रिश्ता इतना मर्मस्पर्शी नहीं हो सकता।

एक माँ का अपने समाज के लिए सबसे बड़ा बलिदान, त्याग क्या हो सकता है?

सोचनीय....

अपने 4 बच्चो के जीवन से बढ़कर ओर कोई त्याग क्या होगा?

किसी भी माँ के लिए अपने बच्चों की मृत्यु देखना सबसे ज्यादा दुःखद होती है और रमाबाई को यह दुःख एक नही चार बार सहना पड़ा।
रमाबाई ने अपने चार बच्चों को अपनी आँखों के सामने दम तोड़ते हुए देखा था।
फिर भी रमाबाई ने बाबासाहेब को लिखा कि "हमारा रमेश इस दुनिया मे नही रहा, उसकी बीमारी आपको इसलिए नही बताई की आपकी पढ़ाई में बाधा नही आए, आप सारी तकलीफ़ों और दर्द को मुझे सौंप दीजिये, मैं हूँ न संभालने के लिए। घर की परेशानियों को दूर करूँगी। इन्हें आपकी राह में अवरोध बनने नहीं दूँगी। मैं ग़रीब की बेटी हूँ। परेशानियों के साथ जीने आदत है। आप चिंता न करें, मन को कमजोर न करें। संसार का काँटों भरा मुकुट जान में जान रहने तक उतारकर नहीं रखना चाहिए।"

ऐसी त्यागमूर्ति मातोश्री रमाई को शत शत नमन...
हमे ममतामयी माँ के बलिदान को व्यर्थ नही जाने देना है। इन्ही विचारो के साथ सभी को मातृ दिवस की बधाई....
                        वंदन
*डॉ० बाबासाहेब अम्बेडकर जन्मभूमि*
       *(डॉ० अम्बेडकर नगर, महू)*

*कोरोना है महामारी, इससे सुरक्षित रहे।*

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