माया भक्त कहते हैं कि सभी ब्राह्मण बुरे नहीं होते, लेकिन वामन मेश्राम साहब जी कहते हैं, "किसी इंसान का ब्राह्मण होना ही बुरा होता है"
माया भक्त कहते हैं कि सभी ब्राह्मण बुरे नहीं होते, लेकिन वामन मेश्राम साहब जी कहते हैं, "किसी इंसान का ब्राह्मण होना ही बुरा होता है"
ब्राह्मण एक ऐसा प्राणी है, जो जहां भी जायेगा, अपनी ब्राह्मणवादी सोच को अपने साथ ले कर जायेगा ! ब्राह्मण कभी भी एससी एसटी ओबीसी समाज के अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठायेगा ! उस का चरित्र ही ऐसा है कि मौका मिलते ही वो अपने दुश्मन की पीठ में खंजर घोंप देगा ! ब्राह्मण पर भरोसा करना खुद को धोखा देने जैसा ही है ।
जब कभी भी ब्राह्मण अपने शत्रु का मुक़ाबला करने में असमर्थ होता है तो वो उस के घर में घुस कर, उसका विश्वास जीत कर उस का हमदर्द बनने का दिखावा कर के फिर वार करता है !
जो लोग ये सोचते हैं कि हम ब्राह्मण के साथ मिलकर ब्राह्मणवाद का मुकाबला कर सकते हैं, वो ना सिर्फ़ खुद को, बल्कि समाज को भी धोखा देते हैं !
भारत का इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब जब ब्राह्मण को मौका मिला, उस ने दुश्मन के भीतरघात हमला किया है । कभी दोस्त बन कर कभी रिश्ता जोड़ कर ! इस की सब से बड़ी उदाहरण मोर्या राजा ब्रहद्रथ की हत्या उस के ब्राह्मण सेनापति पुष्य मित्र शुंग ने की थी, ब्रहद्रथ की पत्नी का भाई था ! एक बात और हमें ध्यान में रखकर चलना होगा कि ब्राह्मण जब भी कुछ बोलता या करता है, उस का कोई ना कोई मतलब होता है ! बिना किसी मकसद के वो कभी भी कुछ नहीं करता या बोलता !
ब्राह्मण का मुकाबला करने के लिए ब्राह्मण से ज्यादा तैयारी करनी होगी !
ठीक वैसे ही जैसे अगर किसी दौड़ में जीत हासिल करनी है तो आगे वाले से तेज दौड़ना होता है !
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