केस १-श्री राम और लल्ला राम को गंवारा नहीं था कि वो राजपूत होकर दो मल्लाहों विक्रम मल्लाह और फूलन देवी की सरपरस्ती में रहें., इसलिए उन्होने गैंग में धीरे-धीरे और अधिक राजपूत भर्ती किए और एक रात धोखे से विक्रम मल्लाह को मार डाला और फूलन देवी को उठाकर अपने गाँव बेहमई ले गए !
केस १-
श्री राम और लल्ला राम को गंवारा नहीं था कि वो राजपूत होकर दो मल्लाहों विक्रम मल्लाह और फूलन देवी की सरपरस्ती में रहें., इसलिए उन्होने गैंग में धीरे-धीरे और अधिक राजपूत भर्ती किए और एक रात धोखे से विक्रम मल्लाह को मार डाला और फूलन देवी को उठाकर अपने गाँव बेहमई ले गए !
जहाँ उन सारे ठाकुरों ने फूलन देवी को हफ़्ते भर तक कमरे में बंद करके उसके साथ बलात्कार किया ।
फूलन ने उस घटना के कुछ सालों बाद उसी गाँव के 22 ठाकुरों को लाइन में खड़ा करके गोली मार दी ।
केस २-
परशुराम द्वारा राजपूत सहस्त्रार्जुन की हत्या करने के बाद जब सहस्त्रार्जुन के पुत्रों ने परशुराम के पिता जमदग्निमुनि कि हत्या कर दी, तत्पश्चात कुपित परशुराम ने पूरी पृथ्वी से एक नहीं, दो नहीं, पूरे इक्कीस बार क्षत्रियों का समूल विनाश कर दिया ।
प्रश्न 1- अगर फूलन देवी द्वारा केवल 22 ठाकुरों की हत्या करना आपको नामंज़ूर लगता है, तो परशुराम द्वारा पूरी धरती के क्षत्रियों की हत्या वाजिब कैसे है ?
प्रश्न 2- अपने मान-सम्मान के लिए लड़ने वाली फूलन देवी दोषी रह गई और परशुराम को विष्णु का अवतार बताकर भगवान बना दिया गया !
हमें परशुराम के भगवान कहलाए जाने से कोई आपत्ति नहीं है., यह उनके भक्तों और उनके भगवान का आपसी मामला है । जिसकी जिस पर श्रद्धा वो उसे माने । हमें क्या !
लेकिन हमारे मतलब का प्रश्न यह है कि जो लोग अपनी ही जाति के 22 बलात्कारियों को मारने पर फूलन को आज भी गरियाते नहीं अघाते हैं.,
उसी जाति के कई लोग फूलन से भी बड़ा, देखा जाए तो संसार का सबसे बड़ा हत्याकांड करने वाले परशुराम पर फूल बरसाते हैं, जिन्होने उन्ही कि जाति का 21 बार पूरी धरती से सफ़ाया कर दिया था ।
यह दोहरा मापदंड क्यों ?
या तो दोनों ही हत्यारे हैं ।
या तो दोनों ही नहीं हैं ।
यह थोड़े न कि फूलन देवी मल्लाह जाति से थी तो उसे कोसो-गरियाओ !
और परशुराम ब्राह्मण थे तो उन्हे देवता बना दो, भगवान का अवतार बता दो ! उनकी पयलगी करो !
ई न चोलबे
इस उदाहरण से हम यह भी समझते हैं कि आदिकाल से जिनके पास कहानियाँ गढ़ने और स्थापित करने कि ताकत थी उन्होने कुछ इसी तरह अपने हिसाब से देवता और असुर रचें हैं !
फूलन देवी अगर 1000-1500 साल पहले होती तो आज उनको असुर/राक्षसिनी के रूप में ही स्थापित कर दिया गया होता ।
(नोट- फूलन देवी ने तो अपने पिता के कहने पर अपनी माँ की हत्या भी नहीं की थी ।)
[प्रतीक सत्यार्थ]
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