*आखिर क्या वजह है की एक बड़ा समुदाय आज भी मानसिक गुलामी से आजाद नहीं हो पा रहा है...❓*

*आखिर क्या वजह है की एक बड़ा समुदाय आज भी मानसिक गुलामी से आजाद नहीं हो पा रहा है...❓*

1. पहला कारण अज्ञानता
2. दूसरा गलत जानकारी
3. तीसरा हम स्वयं आजाद नहीं होना चाहते है❓

*हम आखिर गुलाम क्यों है...❓

जब हम पैदा होते है तो आजाद पैदा होते है❗

फिर हम मानसिक गुलाम कैसे बनते है❓

अगर हम चीन मे पैदा होते तो चीनी भाषा जानते ,
वहां की संस्कृति जानते और बुद्ध को जानते..

अगर इंग्लैंड में पैदा होते तो अंग्रेजी जानते और ईशु को मानते❗

हम भारत मे पैदा हुए और हमारे पुर्वज सैकड़ों वषों से मानसिक गुलाम थे❗
एवं उनको पढ़ने का अधिकार भी नहीं था लेकिन उस इतिहास को पढ़ना और समझना नहीं चाहते❗

गलत जानकारियां रखकर उनपर गर्व कर रहा या समझौता कर रहा है❗
इसलिए *अज्ञानता के कारण वो मानसिक और शारीरिक गुलाम बने❗

लेकिन *आज सब शिक्षित हो गये है! फिर भी मानसिक गुलाम है और वो भी पढ़े-लिखे मानसिक गुलाम❗

हमें इस गुलामी मे आनंद भी आ रहा है❗
मैं मानता हूँ कि गुलामी की जड़ें बहुत गहरी है,

इसलिए हज़ारों सालों की मानसिकता एक दिन मे नही बदल सकती है❗

लेकिन गुस्सा इस बात पर आता है,
कि हम खुद को बदलने की कोशिश ही नहीं कर रहे है❗

याद रखें किसी भी व्यवस्था में तबतक समाज की उन्नति नहीं हो सकती है
जबतक कि उस व्यवस्था में सभी की समान हिस्सेदारी न हो और या फिर निश्चित भागीदारी न हो❗

और हिस्सेदारी, भागीदारी मांगने से नहीं मिलती है।
ऐसा लगता है कि शायद हम किसी मसीहा का इंतज़ार कर रहे है......❓

*हम अज्ञानी नही है, हम सब जानते है, लेकिन हमारी स्थिति उस नशेड़ी जैसी है❗

*जिसे नशे का दुष्परिणाम मालूम तो होता है फिर भी नशे का गुलाम होता है❗
#बोल85
#जयमूलनिवासी

Comments

Popular posts from this blog

ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)

यदि कोई तथाकथित ऊंची जाति वाला किसी तथाकथित छोटी जाति वाले के यहां धोखे से कुछ खा पी लेता है