नई और सही बात लिखने में यही सब परेशानी है कि कई पोस्ट लिखने पड़ जाते हैं।
नई और सही बात लिखने में यही सब परेशानी है कि कई पोस्ट लिखने पड़ जाते हैं।
समझिए, पिशाच मूलतः कश्मीर क्षेत्र के मूल निवासी थे। इनकी भाषा पैशाची प्राकृत थी।
किताबों में पिशाचों को प्रेतात्मा होने की अफवाह फैला दी गई और लोगों ने उसे सत्य मान लिया।
संतोषी माँ कोई देवी नहीं हैं। वह सिनेमा की किरदार हैं।
संतोषी माँ को सत्य मानकर बहुत से लोग पूजा कर रहे हैं।
उसी प्रकार वर्ण -व्यवस्था किताबों में बना दी गई और धीरे - धीरे वह सामाजिक यथार्थ हो गई।और जब यथार्थ हो गई, तब इसी बहाने अत्याचार होने लगे, जैसे पिशाच के नाम पर लोग पागल तो संतोषी माँ के नाम पर संतुष्ट होने लगे।
इसकी उत्पत्ति खोजना व्यर्थ है। यह संस्कृत के आचार्यों तथा नियामकों की किताबी देन है।
कश्मीर में नागों और पिशाचों के प्रभाव को इस बात से समझा जा सकता है कि
500 ई. पू. से पहले के समय को आज भी कश्मीरी भाषा और साहित्य के इतिहास में " नाग - पिशाच युग " कहा जाता है।
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