मेरी यह पोस्ट पढने वाले सभी साथियों से निवेदन*..?.........समाज करवट ले रहा है। जहां एक तरफ बहुजन समाज अंधविश्वास से निकलने की कोशिश कर रहा है, मगर उसके पास बाबा साहेब के कारवां को आगे बढ़ाने वाले चंद ही लोग हैं और साधन भी सीमित हैं।
*मेरी यह पोस्ट पढने वाले सभी साथियों से निवेदन*..?.........
समाज करवट ले रहा है। जहां एक तरफ बहुजन समाज अंधविश्वास से निकलने की कोशिश कर रहा है, मगर उसके पास बाबा साहेब के कारवां को आगे बढ़ाने वाले चंद ही लोग हैं और साधन भी सीमित हैं।
वहीं मनुवादी अपनी पूरी ताकत, अपने प्रचूर मात्रा मे उपलब्ध संसाधनों व खरीदे गये मीडिया की बदौलत बहुजन समाज को पुन: गुलामी की बेडियों मे जकडने की कोशिश कर रहे हैं और वे कामयाब भी होते दिख रहे हैं।
यदि बाबा साहेब के कारवां को आगे बढाने के लिये आप जैसे पढे लिखे लोगों के हाथ आगे नहीं बढे, तो जो हाथ... आज जो कुछ भी कर रहे हैं, वे थक जायेंगे, टूट जायेंगे।
इसलिये इस लेख को पढने वाले मेरे साथियों...........
आगे बढो, एक द्वन्द चल रहा है, एक युद्ध चल रहा है। यह युद्ध अदृश्य है, वैचारिक है, दिमाग से लडा जा रहा है। आपकी... हमारी आने वाली नस्लों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।
उठिये, जागिये और आप जो भी हैं, जहां भी हैं, जैसे भी हैं, जो भी तरीका अपनायें...................
अपने समाज को जगाने का काम करें ताकि आपकी आनी वाली पीढ़ी सुरक्षित रह सके। क्योंकि बाबा साहेब अगर केवल अपना भला सोचते तो आज हम जो भी हैं, जैसे भी हैं... वो नही हो पाते और कीडे मकौडे की जिंदगी जी रहे होते। बाबा साहेब ने तो बहुत त्याग किये, अपना परिवार ही उजाड़ लिया। मै आपसे वो उम्मीद तो नही करता और न ही मुझमे वो सामर्थ्य, जो बाबा साहेब ने किया। किन्तु हम कुछ तो कर सकते हैं.... अपने अपने स्तर पर।
बस वही कीजिये । दिमाग मे सिर्फ एक ही ध्येय होना चाहिये.....
*मुझे मेरे समाज को जगाना है..............*
आगे बढिये......
आप की अपनी भावी पीढ़ी आपके जरा से प्रयास का इंतजार कर रही है...
और कह रही है.............
आप हमारे लिये विरासत मे क्या छोड़ कर जा रहे हैं? *गुलामी की बेडियां या सुकून के पल..... कि हम आपको भविष्य मे इज्जत से याद कर सकें, जैसे आज बाबा साहेब को सब याद करते हैं.....अपने भी और दुश्मन भी*
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