।। मौत का मुहूर्त।।
।। मौत का मुहूर्त।।
पहले बता देते
तो हम घर नहीं आते
वहीं मर जाते
क्योंकि
हमने सोचा
घर चलकर
कुछ आखिरी पल
अपनों के साथ बिता लेंगे।
कुछ पल मा बाप के
साथ रह लेंगे।
कुछ पल बच्चों को
दुलार लेंगे।
कुछ पल
पत्नी की कलाई में
खनकती चूड़ियों की
करवाचोथ वाली
आवाज सुन लेंगे।
दोस्तों को देखकर
थोड़ा बचपन याद कर
मुस्कुरा लेंगे।
बस इतना ही तो जिए थे
चुनाव कराकर
हम ज्यादा।
फिर तो
अस्पतालों का दौर जिया
सब बिका
मकान,
जेवर,
सपने,
इरादे..... और
हौसले भी।
पर हम मरे भी
तो गलत समय पर।
जब कफ़न तय था
तो तय समय में मरते
तय मुहूर्त में मरते!
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