कबीर ने सैकड़ों साल पहले जो बोल दिया है, आज भी उसे बोलने में सैकड़ों बार सोचना पड़ता है....*
*कबीर ने सैकड़ों साल पहले जो बोल दिया है, आज भी उसे बोलने में सैकड़ों बार सोचना पड़ता है....*
*अपने को ऊपर मानते हो तो क्या ऊपर के मुँह से तुम पैदा हुए थे ? नहीं- नहीं ...तुम भी उसी मार्ग से पैदा हुए हो, जिस मार्ग से शूद्र आए हैं।*
*अरे, मंदिर - मस्जिद तो ईंट - पत्थरों का कबाड़ है। जाने क्या- क्या बोल गए......*
*सभी कोई राजा तो कौन बजाएगा बाजा ? सभी कोई रानी तो कौन भरेगी पानी ? कबीर तो घड़ा ही फोड़ देने के पक्ष में थे। न घड़ा रहेगा न पानी ढोना पड़ेगा।*
*तुम्हारी जाति का तो राज- पाठ भी तो नहीं था। तुम तो द्वार पर चढकर चुनौती दे आया, काशी में.....*
*कैसे जिंदा रह गए तुम ? तुम से भी कम कड़वा सच बोलने वाले अनेक क्रांतिकारी तो जहर देकर, सूली चढ़ाकर या अन्य तरीके से या गोलियों से भून दिए गए.....*
*धनि - धनि कबीर!!!*
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