मैँ पाखण्ड, अंधविश्वास, पोंगा पंडित, अज्ञानता, असमानता आदि पर लिखना चाहती हूँ लेकिन पढ़ने वालों को लगता है

मैँ पाखण्ड, अंधविश्वास, पोंगा पंडित, अज्ञानता, असमानता आदि पर लिखना चाहती हूँ लेकिन पढ़ने वालों को लगता है मैँ उनकी आस्था, श्रध्दा, विश्वास आदि पर ठेस पहुंचा रही हूँ। मैँ धर्म, मज़हब, दल, संगठन आदि पर लिखना चाहती हूं लेकिन पढ़ने वालों को लगता है कि मैँ केवल हिन्दू धर्म या मुस्लिम धर्म के ख़िलाफ़ लिखना चाहती हूं।

मैँ राजनीति की फूट डालो, राज करो कि नीति तथा तमाम सरकारों की कुनीतियों के ख़िलाफ़ लिखना चाहती हूँ लेकिन पढ़ने वालों को लगता है मैं बीजेपी व मोदी के ख़िलाफ़ हूँ। मैं शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई, बेरोजगारी, भुखमरी, गरीबी, लाचारी आदि पर लिखना चाहती हूँ लेकिन पढ़ने वालों को लगता है मुझे नेता बनकर राजनीति करना चाहती हूँ।

मैँ साम्प्रदायिकता, असहिष्णुता आदि के ख़िलाफ़ लिखना चाहती हूं पढ़ने वालों को लगता है मैं केवल आरएसएस, बजरंग दल, विहिप के ख़िलाफ़ हूँ। मैँ हर जरूरी विषय पर लिखती रहती हूँ लेकिन पढ़ने वालों को लगता है कि मैं देश के ख़िलाफ़ हूँ  या ऐसा करके मुझे बेहद लाभ मिल रहा है। जबकि बात केवल इतनी है कि हमें हरेक स्थिति को बेहतरीन बनाना है।

असल में यह जो मेरा चाहना और दूसरों का समझना के मध्य जो अंतर है वह भी एक तरह की संकुचित मानसिकता का धोतक है। हम विषयवस्तु को अपने हिसाब से अर्थ निकालना चाहते हैं और यही कारण है कि विषयवस्तु को हमेशा बेहतर करने में असफ़ल रहे हैं। विपरीत परिस्थितियों में ही अपनी वाजिब आवाज को बुलंद करने से इंकलाब आयेगा।

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)