कुछ अनपढ़ बोले हमारी किताबें सबसे अच्छी हैहालांकि उन्होंने कभी नहीं पढ़ी थी कोई किताब

कुछ अनपढ़ बोले हमारी किताबें सबसे अच्छी है

हालांकि उन्होंने कभी नहीं पढ़ी थी कोई किताब
फिर भी वह बताते थे 

कि हमारी किताबों में लिखा है ईश्वर का सही सही विवरण 

अनपढ़ों का गिरोह यह भी बोला कि जो लोग अलग तरह की किताबें पढ़ते हैं वो हर तरह हम से अलग हैं

अनपढ़ों ने यह भी शोर मचाया कि क्योंकि हमारी किताबें अच्छी है इसलिए कुर्सी पर बैठ कर हुकूमत करने का हक भी हमारा है

और जो हमसे अलग किताब वाले हैं उन्हें तो मुल्क छोड़कर वहां चले जाना चाहिए जहां उनकी तरह की तरह की किताब पढ़ने वाले लोग रहते हो 

इस तरह अनपढ़ का राजा आया 

कुर्सी पर बैठे अनपढ़ का हुक्म हुआ कि दूसरी तरह की किताब वालों को सड़क पर कत्ल करना वाजिब है और उनकी औरतों की बेइज्जती असल में धर्म है

उस मुल्क में जो लोग किताबें पढ़ सकते थे वे कहते ही रहे कि सभी किताबों में लिखी है एक सी बातें

इसलिए किताबों के बहाने मत लड़ो
पर अनपढ़ थे बहुत ज्यादा और हुकूमत पर वही काबिज़ थे

इसलिए उन्होंने पढ़ने लिखने वालों को कैद करने का हुकुम दिया

और फिर जब आई मौत की आंधी
पट गई सड़कें लाशों से

तब कुर्सी पर बैठे अनपढ़ ने कहा लाशों का जिक्र भी बगावत माना जाएगा

बड़े-बड़े न्यायाधीश और बड़े-बड़े ज्ञानी मिलाने लगे अनपढ़ की हां में हां 

अनपढ़ के सिपाही बन्दूकें लेकर घूम रहे थे सड़कों पर

ताकि लाशों पर रोने वालों को बगावत के जुर्म में पकड़ सकें

अब सड़कों पर खौफ था लाशें थी और सिपाही थे

अवाम अपने बच्चों को सीने से लगाकर घरों में सिसक रही थी

वे डरते थे कि बच्चे जोर से आवाज न करें और कहीं नौजवान ना मान लिये जायें बागी शोर करने पर

जेलें भर चुकी थी पढ़ने लिखने वालों से

जिन किताबों को अच्छा बताया जा रहा था उन किताबों को पढ़ने वाला न बचा था कोई भी
और इस तरह कुछ किताबों के नाम पर अनपढ़ों का राज कायम हुआ 

- हिमांशु कुमार

Comments

Popular posts from this blog

My thesis on Brahmin Privilege (read the entire thred)1. If I am a Brahmin, I will be revered in the society and a “Ji” will be added to my name. I will be known as a pundit, although I. #dilip c mandal

ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)