परशुराम और हिटलर

परशुराम और हिटलर 
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इस दुनिया मे दो क्रूरकर्मा होगये 
एक परशुराम है और दुसरा हिटलर। 
हिटलर ने अपने जीवन में सत्ता मिलतेही  
साठ लाख ज्यू नागरिक की बडी बेरहमीसे 
गॅस चेंबर मे डालकर हत्या की क्योंकी  
ज्यू लोग नीची वंश के है ऐसी  हिटलरकी 
मान्यता थी,और हिटलर खुदको जर्मन 
याने आर्यवंश का समजता था ।
आज दूनिया के बहुसंख्यलोग हिटलरसे 
घ्रुणा करते है। उसका नाम भी 
अपने बच्चो को नही देना चाहते।
क्योकी वह मानव और मानवताका 
हत्यारा है। वो  मानवता के उपर कलंक है।  
दुनिया की नजरो मे हिटलर एक खलनायक है। 

जब दुनिया की नजर में सब  मानव 
समान है एक ही मानव के उपज है, 
तो यहाँ कौन कैसे श्रेष्ठ और कौन कैसे कनिष्ठ, 
सब मानव बराबर है सबको इस दुनियामे 
जिंदा रहने का जिनेका पुरा अधिकार है, 
ये दुनिया किसी के भी बाप की जागीर 
नही है।ये दुनिया सब की है।

 इस दुनिया में हिटलरके पहले 
 और एक क्रूरकर्मा हो गया जिसका 
 नाम परशुराम है जिसने भारत के सभी 
 क्षत्रियोंकी उनके छोटे छोटे बच्चो सहित 
 सबकी बडे क्रूरतासे बेरहमीसे हत्या किथी,
 और येभी  एक बार नही तो इक्कीस बार 
 हत्या कर डाली थी,यंहाँ तक की उसने 
 क्षत्राणी स्त्रियोके के गर्भ मे पलनेवाले 
 बच्चो को भी मार डाला था इतना वो 
 क्रुर था। उसने ये हत्याऐ भी 
 आर्यवंश श्रेष्ठत्व को कायम रखने के लिए 
 कि थी, क्योंकि उस वक्त आर्यब्राह्मण 
 और क्षत्रिय इनमे कौनसा वंश श्रेष्ठ है 
 इस मुद्दे पर वादविवाद चल रहा था।  
 ब्राह्मण पुरोहित अपने आपको क्षत्रियसे 
 उच्चवर्णके समझते थे, और क्षत्रिय उन्हे 
 उच्च नही मानते थे। ब्राह्मणोका 
 वंशश्रेष्ठत्व कायम रखनेके लिए 
 परशुरामने अपने दलबल के साथ 
 क्षत्रियोपर हमला किया और उन्हे 
 मौत के घाट उतार दिया। 
 ये उस वक्तका सबसे बडा नरसंहार था । 
 परशुराम उस वक्त का हिटलर था।
 जिसने अपना वंश श्रेष्ठत्व मनवानेके लिए 
 भारत के सभी क्षत्रिय को मार डाला था । 
 बात सिर्फ यंहाँ खत्म नही होती,तो इन्होने  
 अपने वंशश्रेष्ठत्व की भावनासे प्रेरीत होकर 
 क्षत्रिय वंशके लोगोको यंहा तक बच्चोकोभी 
 जान से मारडाला था। मेरे खयालसे 
 ये किसी आदमीका काम नहीं था,बल्की
 आदमी के भेंसमे छिपे हैवान का काम था। 
 और इस हिसाबसे परशुराम एक नीच 
 आदमी था। 
 जनावर भी ऐसा नीच काम नही करते। 
 ऐसा नीच काम इस परशुरामने किया था।
 ऐसा नीच काम करनेके विचार इनके 
 मन में कौन भर देता है। ये बात जादा 
 महत्वपुर्ण है क्यो की कोईभी गलत
 काम करनेके पहले आदमीका वैसे 
 मन बनता है  उसकेबाद आदमी  वैसा 
 गलत काम करता है।
 
 
हिटलरपर आज पुरीदुनिया थुकती है , 
और ये सही है ऐसे नीचपरतो थुकनाही 
चाहिये, और इस हिसाबसे 
परशुरामपरभी थुकना चाहिये। 
मगर परशुराम की आज भी भारत मे 
पूजा की जाती है । जिन क्षत्रियोका 
परशुरामने खात्मा किया था,उन  
क्षत्रियोमेसे कुछ  बचे थे बादमे उनका वंश 
पनपा वो आजके क्षत्रिय है।
आज खुदको जो लोग क्षत्रिय समजते है, 
वो भी इस परशुराम के जयंती का 
विरोध नही करते, ना हमलोग  करते है 
इसेही मानसिक गुलामी कहाँ जाता है।
हम भारतवासीके लिये ये शरम की बात है।
जो लोग अपने आपको क्षत्रिय समजते 
उनमे अगर थोडासाभी स्वाभिमान बचा है तो 
उन्होने तुरंत इस  परशुराम का पुतला 
जलाकर इसका निषेध करना चाहिए 
और इसकी जयंतीको  बंद करवाना चाहिये।
इसका उदात्तीकरण करना बंद करने के लिए आंदोलन चलाना चाहिए । 

 मै अवतारवाद को नही मानता मगर जोभी
 लोग अवतारवादको मानते है , मै उन्हे 
 बता देना चाहता हूँ की हिटलरही
 परशुरामका दुसरा अवतार है।
 
वंशश्रेष्ठत्व के लिए जो संघटनाऐ  
20 वी  सदी मे काम करती थी  वो 

1) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है। और 
2) नॅशनल सोशालिस्ट जर्मन लेबर पार्टी 
     यानें नाझी पार्टी थी।

 गोळवळकर गुरुजी कहते है।
 इदं न मम,इदं राष्ट्राय ।
 याने मेरा यंहाँ कुछ भी नही।
 मेरा जो कुछ भी है वो सब  राष्ट्र के लिए है।
 
हिटलरभी कहता था।
 राष्ट्र ही सब कुछ है, सारे लोगोने पुरी
 इमानदारीसे राष्ट्रहित मे काम करना चाहिए।
 
गोलवलकर गुरुजी और रा. स्व.संघ 
परशुराम को  आदर्श मानता है,
और हिंसाका समर्थन करता है ।

हिटलर भी खुलेआम हिंसाका 
समर्थन करता था।

स्वस्तिक चिन्ह रा.स्व.संघकेलिये शुभ है।
हिटलरभी  स्वस्तिक चिन्हको शुभ मानता था। 

गोळवळकर गुरुजी अपनी  किताब 
" वुई आर अवर नेशनहुड  डिफाइन" मे 
वंशश्रेष्ठत्व का सिद्धांत प्रतिपादन करते है।

हिटलरभी कहता था की आर्यवंश 
सभी मानववंशमे श्रेष्ठ है जर्मन आर्य है 
याने श्रेष्ठ है इसलिये पुरे विश्वपर राज करने का अधिकार जर्मनोका है।

 भारत के आर्य याने ब्राह्मण आज एससी एसटी ओबीसी और मायनॉरिटी की घ्रुणा करते है। 
 
हिटलरभी खुदको आर्य समजता था और ज्यू और स्लाव समुदायका तिरस्कार करता था । 
 उसने 60 लाख ज्यू समुदाय का कत्ल कर दिया।
 
" वुई आर अवर नेशनहुड डिफाइन " किताब की प्रस्तावना लिखनेवाले डॉ. मुंजे कई बार हिटलरसे मिले थे, हिटलरसे मिलनेका उनका क्या कारन था कंही वंशश्रेष्ठत्व हिटलरके दिमाग मे संघवालोनेतो नहीं घुसेड दिया इस बात का भी हमे पता करना चाहिये।

आज पूरी दुनियाँमे हिटलरकी छी थू होरही है, 
मगर आजभी रा.स्व.संघ भारत मे 
हिंदुराष्ट्र के नामपर वंशश्रेष्ठत्व का 
पुरजोर समर्थन कर रहा है, इतना ही नही 
पूरे भारत में क्षत्रियोंका वंशविच्छेद करनेवाले परशुराम की जयंती बडे धूम धाम से मनाता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने करतुतोसे 
भारतको कौन सी दिशामे लेके जा रहा है, 
ये आप लोग अंदाजा लगा सकते हो, 
इन्हे अभी रोकना जरुरी है अन्यथा एक दिन 
भारत के शुद्र-अतिशूद्रोका हाल भी 
जर्मनी के ज्यू के समान होगा ये निश्चित है । 
ये आज की तारीख में बहुजनोको  
गॅस के चेंबर में डालकर तो नही मारेंगे 
मगर ऐसे हालत पैदा करेंगा जिसमे 
एससी, एसटी, ओबीसी और मायनॉरिटी 
भुखसे, बिमारीयोंसे और आर्थिक 
समस्याओसे लडते लडते मर जायेंगे या फिर आत्महत्या करेंगे , जो आज हमे स्पश्ट 
दिखाई दे रहा है। मोदीका चेहरा आगे करके  
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघने ऐसे हालत बनाना 
शुरू कर दिया है। आज वैसेभी हमारे पास 
खोनेके कुछभी बचा नहीं है, अब हमें कुछ
पानेकेलिये इनका मुकाबला करनेके सिवाय 
दुसरा रास्ता नहीं।
रवि शेखर आरटीआई कार्यकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता

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