आर.एस.एस के "9 मंत्र" - छलावा या षड़यंत्र ?

आर.एस.एस के "9 मंत्र" - छलावा या षड़यंत्र ?
--------------------------------------------------------

साथियों  , 

      जयहिंद ,

1. "पाजिटिविटी अनलिमिटेड" कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने क्या कहा , आपने शायद सुना या देखा होगा । संलग्न हैं उनके "प्रवचन" के मुख्य अंश जिसमें उन्होंने "Z" सुरक्षा चक्र के अंदर से "9 सूत्रीय" छ्द्म मंत्र दिये हैं ।

2. चलिये "पॉइंट बाई पॉइंट" चर्चा करते हैं :-- 

    * मंत्र 1 (संभलने का वक्त ) - श्रीमान , सम्भल तो वह व्यक्ति सकता है , जो गिरा हो । जिसे बिना चिकित्सा या मात्र आंशिक चिकित्सा के साथ सीधे खाई में ढकेल दिया गया हो , वह कैसे संभलेगा ? उसका तो सिर्फ अंत ही होगा ? संभलने का मौका तो पूरे विश्व ने भारत के "विश्व गुरु" को पिछले एक साल से दिया था , तब तो वो नही संभले और आप भी चुप्पी थाम के सिर्फ तमाशा देख रहे थे ? ऐसा क्यों मोहन भागवत जी ?

    * मंत्र 2 - ( नकारात्मकता नही चाहिए ) - मोहन जी , बड़ा आसान होता है सुरक्षा चक्र तथा एयर कंडिशन्ड दफ्तरों से गुहार लगाना । जब आपकी प्रिय सरकार नकारात्मक कार्यों में पूरी शक्ति से पिछले एक साल से लगी थी , तब आपकी सकारात्मकता कंहा थी ? तब लगाते गुहार और रोकते नकारात्मकता को। जब आग लग चुकी है तब आप कुआं खोदने की बात कर रहे है , ऐसी नकारत्मकता क्यों मोहन भागवत जी ?

      * मंत्र 3 - ( मन नही थकना चाहिए ) - मन कंहा थका है ? थका तो एक जीवन है जो जुमलों , साकार न होने वाले सपनों में उलझ कर , अपने जीवित होने के प्रमाण की दौड़ में दौड़ता रहा और तन , हारकर चिता पर बैठ गया या दफन हो गया या गंगा में बह गया। आप क्या सोचते हैं कि उस थके हुए मृत व्यक्ति के सगे सम्बन्धियों का मन कभी थकेगा ? श्रीमान वो अपने पूरे जीवनकाल में यही सोचता रहेगा कि उसकी क्या ग़लती थी कि वह अपनों का अंतिम संस्कार भी नही कर सका ? मन नही थका है आपकी सोच शायद तक गई है , सही है ना मोहन भागवत जी ?

       * मंत्र 4 - ( जीवन मरण का चक्र ) - सही मंत्र है कि जीवन-मरण का चक्र चलता रहेगा , ये जीवन का सबसे दुखद परंतु कटु सत्य भी है । आप तो "कोरोना हत्याकांड" को दार्शनिक नाम देने की कोशिश कर रहे हैं ठीक वैसे ही जैसे आपके प्रिय प्रधानमंत्री जी इस हत्याकांड को " राष्ट्रीय आपदा " का जामा पहनाकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं । ये तो आप देश को गलत सन्देश दे रहें हैं , ठीक वैसे ही जैसे स्वतंत्रता की लड़ाई के पहले आपके संगठन ने देशवासियों का नही बल्कि अंग्रेजों का साथ दिया था । आप अभी भी वही इतिहास क्यों दोहरा रहे हैं , मोहन भागवत जी ?

       * मंत्र 5 - ( हमारी गफ़लत से संकट गहराया ) - श्रीमान , किसकी गफ़लत थी ? जैसा-जैसा मोदी जी ने कहा देश ने माना थाली बजाने से बत्ती बुझाने तक और लॉक डाउन में घरों में बंद रहने तक सब कुछ तो किया ?  जब प्रधानमंत्री खुद ही विश्व के सामने अपनी पीठ थपथपा रहे हों, ग्रह मंत्री बिना मास्क के विचरण कर रहे हों , लाखों लोग कुम्भ स्नान कर रहे हों , चुनाव रैली कर रहे हों तो देश का आम नागरिक भी इन बड़े बड़े अज्ञानी नेताओं का अनुसरण तो करेगा ही ।  बेटा वही करता है जैसा पिता करता है , महोदय गफ़लत तो आपकी नाकाम केंद्र सरकार तथा अन्य राज्य सरकारों की थी और अब आप उनका दोष आम नागरिकों पर भी मढ रहे है - क्या ये  कायरता नहीं हुई मोहन भागवत जी ?

      *  मंत्र 6 - ( मिलकर काम करना है ) - आदरणीय , किस काम की बात कर रहे हैं आप ? सभी ने मिलकर ही काम किया है और आज भी अपनी हैसियत के अनुसार मिलकर ही काम कर रहे हैं  , मुस्लिम ऑक्सिजन भी दे रहे हैं और हिन्दू शवों का अंतिम संस्कार भी , सिख लंगर चला रहा है तो निशुल्क अस्पताल भी , ईसाई कोविड सेंटर भी चला रहा है तो अनुदान भी दे रहा है , असली हिन्दू सामाजिक कोविड सेंटर के साथ साथ खाना भी बांट रहा है । पर दुख तो इस बात का है कि छ्द्म हिंदुत्व के प्रमाण पत्र बांटने वाले आपके संगठन कँही नज़र नहीं आ रहे है ? कंहा है बजरंग दल जो जय श्रीराम बोलकर हत्या कर देता था ? कंहा है विश्व हिंदू परिषद जो हिंदुओं को सिर्फ बरगला रहा था ? महोदय , आप भी कभी "फील्ड" में नज़र नहीं आये। महोदय काश आप जातियों और धर्मों को जोड़ते तो सभी मिलकर हर मुसीबत का सामना कर सकते थे पर आप भी तो "Divide And Rule" की रणनीति अपना रहे हैं , ये तो देशद्रोह हुआ मोहन भागवत जी ?

      * मंत्र 7 - ( खाली नही रहना, सीखते रहना है ) - आप खुद बताइये कि अब क्या सीखना है ? दंगे करना सीख गये , हत्या करना भी सीख गये , सत्ता की शतरंज भी सीख गये , अब आपने सभी छल कपट सिखा दिए हैं क्या आप भारतीयता और सच्चा देशप्रेम सिखाएँगे? लगता तो नही क्योंकि आपका प्रभुत्व " छ्द्म राष्ट्रवाद " पर है ना कि देशप्रेम पर ।स्वतंत्रता की लड़ाई में आपके अनुयायियों ने हिस्सा नही लिया तो अब आशा करना व्यर्थ है । सही है ना मोहन भागवत जी ?

       * मंत्र 8 - ( धैर्य की परीक्षा ) - फ़िलहाल तो पूरा देश धैर्य की परीक्षा में सफल रहा है , लेकिन कब तक ? श्रीमान पूरा विश्व आज भारत के कुशासन को देख रहा है , और आंकलन भी कर रहा है। इंसान को आप तब तक पीछे धकेल सकते हैं जब तक पीछे दीवाल ना आ जाये और जब ऐसा होगा तो धैर्य टूटकर एक विद्रोही रूप लेकर उछलकर वापस आ सकता है महोदय ।जब तक पाप का घड़ा भर ना जाये , धैय रहेगा। आप भी अपना "छ्द्म हिंदुत्व" का एजेंडा धैर्यता पूर्वक बदलें मोहन भागवत जी ?

       * मंत्र 9 - ( बच्चे पिछड़ ना जायें ) - गजब का मंत्र है । सब कुछ खुल गया स्कूल बंद हैं ।पर आपकी शाखाएं चालू हैं जंहा हिंदुत्व कर आड़ में कट्टरता सिखाई जा रही है। युवा को सुनियोजित नीति के अनुसार अनपढ़ बनाया जा रहा है ताकि उसकी सोच संकुचित रहे क्योंकि शिक्षा बढ़ेगी तो सोच भी , जब सोच बढ़ेगी तो प्रश्न पूछने की शक्ति भी । आप भी नही चाहते कि प्रश्न पूछने वालों की संख्या बढ़े। कुछ प्रश्न पूछने वालों को देशद्रोही घोषित करना आसान है पर ज्यादा जनसँख्या को नही। सही है ना मोहन भागवत जी ? 

  जयहिंद ,

ब्रिगेडियर प्रदीप यदु, सेवानिवृत्त
रायपुर , छत्तीसगढ़

Comments

Popular posts from this blog

My thesis on Brahmin Privilege (read the entire thred)1. If I am a Brahmin, I will be revered in the society and a “Ji” will be added to my name. I will be known as a pundit, although I. #dilip c mandal

ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)