3 अप्रैल 1781 में उत्तरप्रदेश के गोंडा ज़िले में हरिप्रसाद पांडे और प्रेमवती पांडे के घर पुत्र का जन्म हुआ नाम था उसका घनश्याम दास पांडे !
3 अप्रैल 1781 में उत्तरप्रदेश के गोंडा ज़िले में हरिप्रसाद पांडे और प्रेमवती पांडे के घर पुत्र का जन्म हुआ नाम था उसका घनश्याम दास पांडे !
वह ब्राह्मण जाति से था, जिसका धर्म गुरु, पुजारी और कथा वाचक पद पर 100% आरक्षण था. धर्म गुरु बनने के बाद शिष्यों ने उसे भगवान स्वामी नारायण की उपाधि दी. स्वामी नारायण अछूतों मजदूरों को शिष्या नही बनाते !
स्वामी नारायण के सभी शिष्य ज़मींदार, साहूकार और व्यापारी होते. जैसे आज भी स्वामी नारायण सम्प्रदाय पर ब्राह्मण ठाकुर बनियों का वर्चस्व है !
घनश्याम दास पांडे उर्फ स्वामी नारायण ने अंग्रेज़ों से मधुर और बेहतर रिश्ते बनाए थे !
भारत की सबसे बड़ी समस्या जाति वर्ण व्यवस्था और छुआ छूत था. इतनी बड़ी सामाजिक बुराई को उसने अपने भक्ति आंदोलन से छिपा दिया !
स्वामी नारायण ने अपने समय में 6 मंदिरों का निर्माण किया और अपने सम्प्रदाय के प्रचार के लिए 500 परमहंस नियुक्त किए. धोबी कुम्हार चमार लोहार नाई इत्यादि जातियों को अपने श्रम के बदले धन नही धान दिया जाता था. तो मुमकिन है मंदिर बनाने वाले मजदूरों का शोषण कर उन्हें उचित मूल्य नही दिया गया होगा !
स्वामी नारायण के शिष्यों ने 1200 अस्पताल नही, 1200 भव्य मंदिर बनाए - ताकि ब्राह्मण पुजारी बनकर ऐशोआराम की ज़िंदगी बसर कर सकें !
अमेरिका के न्यू जर्सी में स्वामी नारायण मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा था - जहां भारतीय मजदूरों का पासपोर्ट जब्त कर उनसे एक डॉलर यानी 75 रुपए प्रति घन्टे के लिहाज से काम कराया जा रहा था !
FBI ने काम बंद कराकर मजदूरों को मुक्त कराया और ब्राह्मणों पर क़ानूनी रूप से ठुकाई शुरू कर दी है. ब्राह्मण धर्म जहां जाएगा वहां गंदगी फैलाते जाता है !
✍️✍️Kranti Kumar
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