वीरता के प्रतिमान #यदुवंशी वीर आल्हा और ऊदल आल्हा ऊदल का भाला 125 किलो का था, जिनका कद 8 फिट 4 इंच का था, वजन 225 किलो था, इनकी ढाल 150 किलो की थी कवच 270 किलो का था और कहा जाता है कि एक बहुत बड़े चर्चित योद्धा को तीन बार अभय दान दिया था।
वीरता के प्रतिमान #यदुवंशी वीर आल्हा और ऊदल
आल्हा ऊदल का भाला 125 किलो का था, जिनका कद 8 फिट 4 इंच का था, वजन 225 किलो था, इनकी ढाल 150 किलो की थी कवच 270 किलो का था और कहा जाता है कि एक बहुत बड़े चर्चित योद्धा को तीन बार अभय दान दिया था।
इन यदुवंशी भाइयों से बड़े बलशाली तो हनुमान और भीम ही थे।
इनके समय या इनके बाद कोई इनके जैसा वीर इस पृथ्वी पर पैदा ही नही हुआ।
इन दोनों ने 52 युद्ध लड़े और कोई युद्ध इन्होंने नही हारा।
ऊदल ने किसी चौहान राजा को तीन बार अभय दान दिया था उसी चौहान राजा ने ऊदल की हत्या कर दी। आल्हा के क्रोध का ग्रास उस चौहान राजा की सेना बनी जिसको आल्हा ने गाजर मूली की तरह काट डाला और उस राजा को भी पटक पटक जान से मारने की ठान ली थी। ऊदल युधिष्ठिर तो आल्हा भीम के अवतारी कहे गए।
आल्हा अपने भाई की हत्या की खबर सुनकर अपना आपा खो बैठे और पृथ्वीराज चौहान की सेना पर मौत बनकर टूट पड़े यह लड़ाई 1182 ई में लड़ी गयी,आल्हा के सामने जो आया मारा गया । लगभग एक घंटे के घनघोर युद्ध के बाद पृथ्वीराज चौहान और आल्हा।
आमने-सामने थे, दोनों में भीषण युद्ध हुआ, पृथ्वीराज चौहान बुरी तरह घायल हुए आल्हा अपने शत्रु को पटक पटक कर जमीन से मार रहे थे गुरु गोरखनाथ के कई बार कहने पर आल्हा ने पृथ्वीराज चौहान को जीवनदान दिया और बुंदेलखंड के महा-योद्धा आल्हा ने नाथ पंथ स्वीकार कर लिया। इन यदुवंशी अहीर वनाफरों की वीरता के किस्से इतिहासकार पचा नही पाये इन्होंने 52 युद्ध लड़े और एक भी युद्ध नही हारे इतिहासकारों ने इनकी वीरता इतिहास से छुपाए रखी।
आल्हा ऊदल के वीरता के किस्से जब होते है तो मुर्दे के खून में भी उबाल आने लगता है आज एक अमर पराक्रमी योद्धा आल्हा ऊदल का जन्मदिन है।
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