मेरा नजरिया अलग है मेरी सोच भी अलग है मै भेद चाल नही चलता 1000 लोग जिनको सही बोल दे उनको मै भी सही ही बोल दूँ ये मेरा काम नही बुद्ध ने कहा जांचो परखो देखो फ़िर यकिन करो
मेरा नजरिया अलग है मेरी सोच भी अलग है मै भेद चाल नही चलता 1000 लोग जिनको सही बोल दे उनको मै भी सही ही बोल दूँ ये मेरा काम नही बुद्ध ने कहा जांचो परखो देखो फ़िर यकिन करो । आज के लोग बोलते है विज्ञान को सब कुछ मानते है और विज्ञान को प्रथम पायदान पर रखते है । लेकिन
कुएं का मेला कुचला पानी पी कर भी इन्सान बिमार नही पड्ता और आर, ओ का पानी सेहत खराब कर रहा है ।
घाणी का तेल खा कर 100 साल जीने वाला डबल फिल्टर तेल खा कर 40 साल मे बुढापा के द्वार पर खड़ा नजर आता है । डले का नमक खा कर उसे कुछ नही होता था आयोडीन युक्त नमक खा कर भी इन्सान ने क्या उखाड़ लिया । नमक , कोयला ,नीम का दातून , बबूल का दातून कर के इन्सान 80 साल की उम्र मे भी चने खाता चबाता था और कोलगेट के जमाने मे 25 साल की उम्र मे डेंटिस्ट के चक्कर लगाता नजर आता है।
हकीम नाडी पकड अपनी सुज बूज़ से लोगो को ठीक करते थे आज के डॉक्टर 100 अलग अलग टेस्ट के बाद भी कुछ नही कर पाता। सुन्दर दिखने की हर प्रोडक्ट यूज करने के बाद भी हंम सुन्दर नही दिखते फ़िर ऐसी हजारो प्रोडक्ट हम यूज करते आये है। क्युकी हम सब कुछ आसानी से मान जाते है की सामने वाला हमको गलत नही बोल रहा है चाहे वो खाने की चीज़ हो ,पहेन ने की चीज़ हो साबुन ,पावडर ,हो या कोई समान । पता नही हम विज्ञान मे जी रहे है की अज्ञान मे !
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