वो मुंसिफ हैं तो क्या कुछ भी सजा दे देगें हम भी रखते हैं जबां पहले खता पूछेंगे यह रहा नामा-ए-आमाल मगर तुझसे भी कुछ सवालात तो हम भी ए खुदा पूछेंगे
वो मुंसिफ हैं तो क्या कुछ भी सजा दे देगें
हम भी रखते हैं जबां पहले खता पूछेंगे
यह रहा नामा-ए-आमाल मगर तुझसे भी
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