barabanki...महामहिम राज्यपाल को ज्ञापनमिर्जापुर उन्नावपुलिस द्वारा निर्ममता से हत्यापरआवश्यक कार्यवाही के लिए महामहिम को ज्ञापन

 *अखिल भारतीय यादव महासंघ* के *राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रामजीत यादव* निर्देश पर  *प्रदेश अध्यक्ष विधि प्रकोष्ठ श्री कृष्ण गोपाल यादव* एडवोकेट हाई कोर्ट लखनऊ , एवं *प्रदेश महासचिव विधि प्रकोष्ठ श्री दान सिंह यादव एडवोकेट  अखिल भारतीय यादव महासंघ* द्वारा आज दिनांक 20/2/ 2021 मिर्जापुर जौनपुर उत्तर प्रदेश निवासी निर्दोष स्वर्गीय किशन उर्फ पुजारी यादव पुत्र श्री तिलकधारी यादव कि दिनांक 11/2/2021 कि रात को पुलिस द्वारा निर्ममता पूर्वक की गई हत्या की सीबीआई जांच कराए जाने और एक परिजन को सरकारी नौकरी और 1 करोड़  रुपए परिजन को  अदा करने के लिए *ज्ञापन  अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व बाराबंकी* को दिया गया एवं उन्नाव में बलात्कार से पीड़ित एक छोटी नन्ही परी जिसे बलात्कारियों और अपराधियों द्वारा निर्ममता पूर्वक बलात्कार करके हत्या की गई उस पर योगी सरकार कुछ नहीं कर पा रही है एवं अन्य तमाम अपराधिक मामले जो संज्ञान में आए उनका आज ज्ञापन दिया गया और माफियाओं के उत्पीड़न से  छुब्ध  होकर अधिवक्ता मुकेश पाठक व मेरठ में विधायक दिनेश खटिक व माफियाओं के उत्पीड़न से छुब्ध अधिवक्ता ओमकार तोमर को आत्महत्या के लिए विवश होना पड़ा । दोषी पुलिस कर्मियों व विधायक सहित सभी आरोपियों के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्यवाही करने तथा पीड़ित परिवारों को एक - एक करोड़ का मुआवजा वह आश्रितों को सरकारी नौकरी आदि मामलों में लेकर विरोध दिवस मनाया जाएगा । तोमर एवं अन्य अधिवक्ताओं के ऊपर प्रताड़ित यौन शोषण एवं शोषण प्रशासन और पुलिस द्वारा लगातार किया जा रहा है जिससे परेशान होकर कई अधिवक्ताओं ने आत्महत्या की है एटा का मामला था और अन्य इसी तरह के कई मामले हैं लगातार अधिवक्ताओं के ऊपर हो रहे हमले और इस तरह से प्रदेश में बढ़ रहे अपराध को योगी सरकार नियंत्रित नहीं कर पा रही है जिससे अपराध अनियंत्रित हो गया है और इसी इसी विषय पर सामूहिक रूप से मिलकर ज्ञापन बाराबंकी जिला अपन अधिकारी जिला अपर जिला अधिकारी महोदय को या सौंपा गया है महामहिम राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया है जिससे भरोसा और विश्वास है कि तत्काल कुछ इन मामलों पर कार्यवाही की जाएगी

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)