उच्च न्यायालय के अधिवक्ता ने देवा पुलिस पर धमकी देने का लगाया आरोप देवा बाराबंकी सरकार ने भले ही जन सूचना अधिकार अधिनियम का नियम पारित किया हो किसी विभाग का भ्रष्टाचार हो या कोई नियमावली की अनदेखी अगर आपने जन सूचना मांगी है तो उसका जवाब देना लाजमी है लेकिन अगर आपने थाना देवा से जन सूचना मांगी है तो पुलिस आपको पहले बुलाएगी कि समझआएगी फिर आप का क्रेडिट खराब कर देने की नसीहत भी दी डालेगी यानी पुलिस की नजर में थाने की सूचना मांगना कानूनन जुर्म ही नहीं बहुत बड़ा अपराध है जो आपका कैरियर खराब कर सकता है यह कोई आम आदमी नहीं लखनऊ के 5 वर्षों से अभिनव रहित अधिवक्ता कृष्ण गोपाल ने जो देवा के ही निवासी भी हैं कि उनके बताए अनुसार उन्होंने जन जन सूचना अधिकार में एसपी से थाना देवा संबंधित जन सूचना में थानाध्यक्ष की तैनाती के नियम पेट्रोल डीजल का वाहन व थानों से आने वाली आय स्रोतों का ब्यौरा मांगा जानकारी अनुसार लखनऊ हाई कोर्ट अधिवक्ता कृष्ण गोपाल यादव अनुसार उसको पहले तो थाने में बुलाकर दीवान so की मौजूदगी में बड़ी विनम्रता से समझाया कि वकील साहब आप तो विद्वान हैं यह फालतू का काम क्यों कर रहे हैं आपको आगे और भी बहुत पढ़ाई करनी है pcs j की तैयारी करनी होगी आपका कैरियर खराब हो सकता है क्योंकि पुलिस के हाथों में कैरियर का सर्टिफिकेट है आज बंद शब्दों में बाकायदा धमकी आरटीआई के जवाब में अधिवक्ता के बताए अनुसार दी गई तो वह अवाक रह गये अधिवक्ता की माने तो जन सूचना अधिकार अधिनियम कब पारित हुआ था तो उन्होंने भी ऐसी कल्पना नहीं की होगी कि थाने से भी ऐसा जवाब मिल सकता है या फिर जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत के जब कानून बनाया गया था तब अभी इसमें संविधान व सरकार की तरफ से कोई संशोधन नहीं किए जाए तो देवा पुलिस से एक बार जरूर सहमति ले ली जाए पता नहीं जन सूचना अधिकार के नियम सरकार संविधान के अनुसार क्या बनाया गया हो और देवा पुलिस अपने नियम पर काम करना शुरू कर दें

Comments

Popular posts from this blog

My thesis on Brahmin Privilege (read the entire thred)1. If I am a Brahmin, I will be revered in the society and a “Ji” will be added to my name. I will be known as a pundit, although I. #dilip c mandal

ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)