Zydus Cadila ने भारत में लॉन्च की COVID-19 की दवा, जानें कीमत

Zydus Cadila ने भारत में लॉन्च की COVID-19 की दवा, जानें कीमत

फार्मा कंपनी जायडस कैडिला ने भारत में घातक महामारी कोरोना की दवा सस्ती कीमत पर लॉन्च कर दी है। देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 67 हजार नए मामले सामने आए हैं, वहीं 47 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई हैं।

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नई दिल्ली। देश में जारी कोरोना के कहर जारी है। भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 67 हजार नए मामले सामने आए हैं, वहीं 47 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई हैं। ऐसे में राहत की बात ये है कि फार्मा कंपनी जायडस कैडिला ने भारत में इस घातक महामारी की दवा सस्ती कीमत पर लॉन्च कर दी है।

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मडेसिवीर की कीमत 2,800 रुपये प्रति 100mg शीशी

बता दें कि गिलियड साइंसेज की एंटीवायरल ड्रग रेमडेसिवीर का सबसे सस्ता जेनेरिक संस्करण लॉन्च किया। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, कंपनी ने इसकी कीमत 2,800 रुपये प्रति 100mg शीशी रखी है।

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रेमडेसिविर की मांग बढ़ी

आपको बता दें कि दुनिया के कई देशों के अस्पतालों में क्लीनिकल ट्रायल के दौरान ये तथ्य सामने आए थे कि रेमडेसिविर कोरोना के लक्षण की अवधि को 15 दिनों से घटाकर 11 दिन कर सकता है। इस कारण भी रेमडेसिविर की मांग बढ़ गई है। हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ये कोई प्रभावी उपचार नहीं है। लेकिन किसी भी दवा की गैर मौजूदगी में डॉक्टर्स भारत में कोरोना के मरीजों के लिए ये दवा लिख रहे हैं। इस कारण दिल्ली और भारत के अन्य शहरों में इसकी मांग बढ़ गई है।

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अमेरिका ने भारत में ये दवा बनाने की अनुमति दी

अमेरिका में स्थित गिलिएड साइंसेज ने मूल रूप से इबोला के इलाज के लिए रेमडेसिविर बनाया था। अब इसने भारत की सिप्ला, जुबिलिएंट लाइफ, हिटेरो ड्रग्स और माइलॉन को भारत में ये दवा बनाने की अनुमति दे दी है।

ZyCoV-D का इंसानों पर ट्रायल शुरू

बता दें कि Zydus ने अपनी संभावित कोविड-19 वैक्सीन ZyCoV-D का इंसानों पर ट्रायल शुरू कर दिया है। कंपनी ने एक नियामकीय जानकारी में बताया कि पहले चरण में वह देश के विभिन्न हिस्सों में 1000 लोगों को इसके लिए इनरॉल करेगी। ZyCoV-D का एडेप्टिव फेज I/II ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल पहली इंसानी डोज के साथ शुरू हो चुका है।

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)