एक रूपये की कीमत तुम क्या जानो बेशर्म प्रशांत बाबू : Surender ,Editor ,LP


देश

एक रूपये की कीमत  तुम क्या जानो  बेशर्म प्रशांत बाबू : Surender ,Editor ,LP

चुनाव में जीत लाखो वोट से हो ये जरूरी  नहीं एक  वोट से जीत जीत होती  है एग्जाम में आई ए एस का टोपर बनने  के लिए सो दो सो  मार्क्स  ज्यादा लाना जरूरी नहीं  उसके लिए भी सिर्फ एक नम्बर  ही काफी है

यही हाल समाज में मान सम्मान में  भी होती  है   एक रूपये का मान सम्मान  बहुत बड़ी चीज होती  है बजाय इसके कुछ भी न दिया जाए , आज देश में पचास पैसे के लिए कत्ल भी हो जाते है क्योकि वहा बात एक रूपये  या पचास पैसे की नहीं होती बात मान सम्मान  की होती है



अप बाजार में चल रहे है अगर कोई व्यक्ति आपसे ऊँची आवाज में बात ही कर दे वही अपमान हो जाता   है उसके लिए आपके साथ मार पीट करना जरूरी नहीं होती 

लेकिन बेशर्म  लोग यह कह सकते है कि  क्या हुआ  सिर्फ ऊँची आवाज में ही तो बोला है , अरे  तो क्या हुआ सिर्फ गाली  ही तो दी है

दरसल यही हाल आज प्रशांत भूषण का हो रहा है  वह अदालत  द्वारा दिए अगये जुर्माने को भी अदालत का अपमान  बता रहा है  ,

प्रशांत भूषण को यह समझना चाहिए कि आज अदालत ने साबित कर दिया कि  सजा सबको मिलेगी  ये माना  आपके जीअवं के इतने साल कानून की सेवा के लिए आप पर जुर्माना   टोकन की तरह किया लेकिन किया तो सही

अदालत  ने साफ़ किया कि  किसी को भी बक्शा  नहीं जाएगा  ,

इस बात का उधाह्र्ण  देकर कोई भी अपराधी जिसने  अदालत का अपमान किया है वह सजा से नहीं बच पाएगा

यानी सजा अहर किसी को मिलेगी

अगर प्रशांत भूषण को सच में आदर्श की लड़ाई  लड़नी है  तो उसे यह जुर्माना  नहीं भरना चाहिए बल्कि बड़ी बेंच में जा कर दुबारा केस लड़े  या सजा  भुगतने को तैयार  रहे 

वरना यह एक रुपया सिर्फ एक रुपया नहीं है बल्कि ऐसा घटक प्रहार है  जो आगे आने वाले लोगो  पर बड़ी  जोर से चलेगा  और बड़े  ही घातक तरीके से चलेगा 

यह एक रूपये के जुर्माना   भरने का मतलब है की आपने सच में अपराध  किया है इसलिए आपने जुर्माना  भरा है  वरना  न्याय के लिए लड़ने  वाला अपने लिए क्यों नहीं लड़ा    लोकतंत्र के मूल्यों  के लिए क्यों नहीं लड़ा 

या इसका एक मतलब हो सकता है कि प्रशांत भूषण  ने  डर  कर हार मान ली है  और इस मसले को यानी केस को यही निपटाने में  अपनी अक्लमंदी  समझी यानी अपनी जान बचा  ली  लोकतंत्र को सच्चाई  को दाव पर लगा कर अपनी तथाकथित  जान  और मान सम्मान   बचा  लिया

लेकिन सच में ये प्रशांत भूषण की हार है लोकतंत्र की हार है

Comments

Popular posts from this blog

ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)

यदि कोई तथाकथित ऊंची जाति वाला किसी तथाकथित छोटी जाति वाले के यहां धोखे से कुछ खा पी लेता है