#बीजेपी नेता और माफियाओं से तंग आकर एक महिला अधिकारी ने जान गवां दी !!UP में #जंगलराज माफिया, अफ़सरों और नेताओं के गठजोड़ से तंग एक ईमानदार महिला PCS अधिकारी मणिमंजरी राय ने बलिया में अपने आवास पर फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह ग़ाज़ीपुर की रहने वाली थी। वरिष्ठ अधिकारी नेता और माफ़िया उस पर लगातार बग़ैर काम के ही भुगतान करवाने का दबाव बना रहे थे। मना करने पर पहले उनके गाड़ी का ड्राइवर छीन लिया गया और फिर सरकारी आवास भी नहीं दिया गया। नापाक गठजोड़ में शामिल अफ़सर नेता उसे लगातार परेशान कर रहे थे। #भाजपा नेता मनियर नगर पंचायत अध्यक्ष भीम गुप्ता मणिमंजरी राय को गलत कार्य करने के लिए प्रताड़ित कर रहे थे और ऊपरी अफसरों से भी दबाव बना रखा था!😰😰

Release Dr Kafeel Khan
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#सिस्टम_की_भेंट_चढ़ते_डाॕ_कफ़ील_अहमद_ख़ान

एक ऐसा व्यक्ति जो #गंदी_राजनीति की सूली चढ़ा दिया गया.... न उसकी #कर्मठता काम आई ना ही उसकी #सहृदयता... सबकुछ मिट्टी में मिल गया...वजह एक ऐसी कौम का हिस्सा होना जिस पर 6 सालों से नए किस्म के गिद्धों की नज़र है जो #दाढ़ी और गोल #जालीदार_टोपी को चुन चुन कर टारगेट कर रहे हैं।
डॉ कफ़ील ...ये वो नाम है जो किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं.... लेकिन सियासत नामक कुत्ती चीज़ ने अच्छे भले इंसान को भी बिना किसी कुसूर के जेल में डाल कर सड़ा रहे हैं।
उनके #अक्षम्य_अपराध पर आइए नज़र डालें...
👉 #आक्सीजन की कमी से मरते अबोध बच्चों को जीवनदान देने के लिए दिन रात एक कर देना और खुद के रिसोर्सेज से आक्सीजन सिलेंडरों का इंतजाम करना।
👉 #चमकी_बुखार जैसी जानलेवा मौसमी बुखार से मासूमों को बचाने के लिए दिन और रात एक कर देना।
👉 #कोरोना जैसी महामारी से लड़ने के लिए लोगों को समझाना और उससे बचाव के तरीके बताना।
☝️अब ऐसे भयानक अच्छाई के कामों का नतीजा भयानक ही होना था... क्योंकि वे भूल गए थे कि वे कितनी  भी जानें बचा लें...उनकी कोई भी नेकनामी उनके मुसलमान होने की कमी को ढक नहीं सकता।
डॉ कफ़ील का ये लिखित बयान कि 'अगर जेल में मुझे मार दिया गया और आत्महत्या करार दिया जाए तो ये तय माना जाए कि मेरी हत्या हुई है क्योंकि कफ़ील इतने कमजोर व्यक्तित्व का व्यक्ति नहीं हो जो जेल की सलाखों के पीछे आत्महत्या जैसी कायराना हरकत करे।'

आइए एक बार फिर डॉ कफ़ील के लिए मिलकर आवाज़ उठाएं।

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)