बिक्री के एक हिस्से का भुगतान न होना एक रजिस्टर्ड सेल डीड को रद्द करने का आधार नहीं : सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network9 July 2020 8:23 PM सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बिक्री के एक हिस्से का भुगतान न होना एक रजिस्टर्ड सेल डीड को रद्द करने का आधार नहीं है। अदालत गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर विचार कर रही थी जिसने ट्रायल कोर्ट के आदेश की पुष्टि की थी, जिसमें CPC के आदेश VII नियम 11 (डी), के तहत प्रतिवादियों द्वारा दायर किए गए आवेदन की अनुमति देते हुए कि वादी द्वारा दायर मुकदमे पर समय सीमा के कारण रोक लग गई थी। ज़मीन पर सेल डीड (जो पांच साल से अधिक पहले निष्पादित की गई थी) को रद्द करने के लिए इस आधार पर वाद दायर किया गया था कि कलेक्टर द्वारा निर्धारित बिक्री राशि का प्रतिवादी द्वारा पूरी तरह से भुगतान नहीं किया गया था। सेल डीड को रद्द करने की राहत की मांग करने वाले एक सूट के लिए सीमा की अवधि तीन साल है, जो उस तारीख से शुरू होती है जब पहले मुकदमा दायर करने का अधिकार शुरू होता है। Also Read - पितृसत्ता और यौन हमले : महिलाएं और अदालत विषय पर वेबिनार से जुड़िए अपील को खारिज करने के अपने फैसले में जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​की पीठ ने CPC के आदेश VII नियम 11 के तहत आवेदन तय करने के लिए लागू कानून का सार दिया है। विद्याधर बनाम मणिकराव (1999) 3 SCC 573 के फैसले और संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 की धारा 54 का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि शब्द "भुगतान किया गया या वादा किया गया या भाग में भुगतान किया गया और भाग में भुगतान का वादा किया गया है, "
https://hindi.livelaw.in/category/news-updates/non-payment-of-part-of-sale-consideration-is-not-a-ground-for-cancellation-of-registered-sale-deed-sc-159650

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ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)

यदि कोई तथाकथित ऊंची जाति वाला किसी तथाकथित छोटी जाति वाले के यहां धोखे से कुछ खा पी लेता है