समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने कहा है कि राज्य सरकार के दावे के अनुसार सन् 2017 में 9 करोड़ और 2018 में 15 करोड़ वृक्ष लगे थे। अचानक सन् 2019 में 22 करोड़ पेड़ लग गए और अब सन् 2020 में 25 करोड़ वृक्षारोपण का रिकार्ड बनाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार के कथित वृक्षारोपण का ये दिखावटी दावा पूछ रहा है कि भाजपाई जनता से झूठ बोलते-बोलते क्या अब पेड़ों से भी बोलने लगे हैं? प्रदेश की 23 करोड़ की आबादी और वृक्षारोपण 25 करोड़, यह कितना व्यवहारिक और कितना सम्भव है? भाजपा के चार सालों में कितने पेड़ लगाए गए और उनमें कितने जीवित बच पाये। इसका ब्यौरा कहाँ और कैसे मिलेगा है? भाजपा सरकार को यह तो बताना ही चाहिए कि इतना जमीनी रकबा कहां चिह्नित हुआ जिस पर वृक्षारोपण कार्यक्रम सम्पन्न किया गया। भाजपा की झूठ की फैक्ट्री में रोज झूठ के नए आविष्कार किए जाते हैं। लेकिन जनता से कुछ छुपा नहीं है। भाजपा सच्चाई पर पर्दा नहीं डाल सकती है। कितना सच कितना झूठ जनता सब जानती है। भाजपा के झूठ के दावों के विपरीत समाजवादी पार्टी की सरकार में पर्यावरण को दृष्टिगत रखते हुए उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया था। एशिया का सबसे बड़ा पार्क जनेश्वर मिश्र पार्क लखनऊ में 400 एकड़ जमीन में बना है। जिसमें विभिन्न किस्म के वृक्ष लगाए गए हैं। लखनऊ में ही इससे पूर्व बने डाॅ0 लोहिया पार्क में भी लोग बड़ी संख्या में जाते हैं। राजधानी में पारा क्षेत्र के पहले लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे तक अवध वन प्रभाग के अन्तर्गत समाजवादी सरकार में बड़े पैमाने पर हरित पट्टी में वृक्षारोपण किया गया, जिससे पूरा क्षेत्र आज भी हरियाली से आच्छादित है। इटावा के लाॅयन सफारी के एक हजार एकड़ में वृक्षारोपण किया गया। समाजवादी सरकार में एक दिन में राज्य में 5 करोड़ वृक्षारोपण का रिकार्ड गिनीज बुक में दर्ज है। समाजवादी सरकार में ही बुन्देलखण्ड और कन्नौज में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया था, जिसमें जलपुरूष श्री राजेन्द्र सिंह भी शामिल हुए थे। भाजपा को उतनी ही हांकनी चाहिए जितनी व्यवहारिक और भौतिक सत्यता के करीब हो। लम्बी-चैड़ी हांकते-हांकते भाजपा ने उत्तर प्रदेश को अधोगति में पहुंचा दिया। भाजपा सरकार में तमाम घोटालों की लम्बी सूची है, वहीं भाजपाई दौर का वृक्षारोपण भी कहीं महाघोटाले की श्रेणी में न आ जाय? समाजवादी सरकार में इसकी निष्पक्ष जांच की जाएगी। (राजेन्द्र चौधरी) मुख्य प्रवक्ता

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने कहा है कि राज्य सरकार के दावे के अनुसार सन् 2017 में 9 करोड़ और 2018 में 15 करोड़ वृक्ष लगे थे। अचानक सन् 2019 में 22 करोड़ पेड़ लग गए और अब सन् 2020 में 25 करोड़ वृक्षारोपण का रिकार्ड बनाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार के कथित वृक्षारोपण का ये दिखावटी दावा पूछ रहा है कि भाजपाई जनता से झूठ बोलते-बोलते क्या अब पेड़ों से भी बोलने लगे हैं? प्रदेश की 23 करोड़ की आबादी और वृक्षारोपण 25 करोड़, यह कितना व्यवहारिक और कितना सम्भव है? भाजपा के चार सालों में कितने पेड़ लगाए गए और उनमें कितने जीवित बच पाये। इसका ब्यौरा कहाँ और कैसे मिलेगा है?
      भाजपा सरकार को यह तो बताना ही चाहिए कि इतना जमीनी रकबा कहां चिह्नित हुआ जिस पर वृक्षारोपण कार्यक्रम सम्पन्न किया गया। भाजपा की झूठ की फैक्ट्री में रोज झूठ के नए आविष्कार किए जाते हैं। लेकिन जनता से कुछ छुपा नहीं है। भाजपा सच्चाई पर पर्दा नहीं डाल सकती है। कितना सच कितना झूठ जनता सब जानती है।
      भाजपा के झूठ के दावों के विपरीत समाजवादी पार्टी की सरकार में पर्यावरण को दृष्टिगत रखते हुए उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया था। एशिया का सबसे बड़ा पार्क जनेश्वर मिश्र पार्क लखनऊ में 400 एकड़ जमीन में बना है। जिसमें विभिन्न किस्म के वृक्ष लगाए गए हैं। लखनऊ में ही इससे पूर्व बने डाॅ0 लोहिया पार्क में भी लोग बड़ी संख्या में जाते हैं। 
      राजधानी में पारा क्षेत्र के पहले लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे तक अवध वन प्रभाग के अन्तर्गत समाजवादी सरकार में बड़े पैमाने पर हरित पट्टी में वृक्षारोपण किया गया, जिससे पूरा क्षेत्र आज भी हरियाली से आच्छादित है। 
      इटावा के लाॅयन सफारी के एक हजार एकड़ में वृक्षारोपण किया गया। समाजवादी सरकार में एक दिन में राज्य में 5 करोड़ वृक्षारोपण का रिकार्ड गिनीज बुक में दर्ज है। समाजवादी सरकार में ही बुन्देलखण्ड और कन्नौज में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया था, जिसमें जलपुरूष श्री राजेन्द्र सिंह भी शामिल हुए थे। 
      भाजपा को उतनी ही हांकनी चाहिए जितनी व्यवहारिक और भौतिक सत्यता के करीब हो। लम्बी-चैड़ी हांकते-हांकते भाजपा ने उत्तर प्रदेश को अधोगति में पहुंचा दिया। भाजपा सरकार में तमाम घोटालों की लम्बी सूची है, वहीं भाजपाई दौर का वृक्षारोपण भी कहीं महाघोटाले की श्रेणी में न आ जाय? समाजवादी सरकार में इसकी निष्पक्ष जांच की जाएगी। 
                                                                    (राजेन्द्र चौधरी)
                                                                     मुख्य प्रवक्ता

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My thesis on Brahmin Privilege (read the entire thred)1. If I am a Brahmin, I will be revered in the society and a “Ji” will be added to my name. I will be known as a pundit, although I. #dilip c mandal

ये फोटो में जिस जज को आप देख रहे हैं इनका नाम है जस्टिस कर्णन...पूरा नाम है चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन....ये जज साहेब न्यायालय की अवमानना ​​के लिए छह महीने की जेल की सजा काटकर अब बाहर आ रहे हैं... वह मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। वहां के पहले दलित न्यायाधीश और पहले दलित न्यायाधीश रहते हुए जेल की सजा काटने वाले भी पहले न्यायाधीश हैं--सजा किस बात की दी गई....सच बोलने की...!!!आइए थोड़ा पीछे ले चलते हैं ...वर्ष 2017 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा....इस पत्र में 20 न्यायाधीशों के भ्रष्टाचार की जानकारी थी....पत्र "सच्चा" था इसलिए "विवाद बड़ा" था! सच से संवैधानिक संकट पैदा हो गया...!! क्योंकि इतिहास में पहली बार किसी मौजूदा न्यायाधीश ने दूसरे न्यायाधीशों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाये थे। केंद्र सरकार इस पत्र को जारी करने के लिए तैयार नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ न्यायालय की अवमानना ​​का मामला दर्ज कर लिया..! अब बारी थी सच को "कैद-ए-बामशक्कत" देने की....! सब सच के खिलाफ लट्ठ लेकर खड़े हो गये...!!!न्यायमूर्ति कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कुछ अन्य न्यायाधीशों को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सच को कैद कर दिया। चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित न्यायाधीश ने छह महीने की जेल की सजा काटी। उस समय उनका विरोध करने वालों ने कहा था कि वे पागल हैं....लेकिन फिर समय बीता....फटाफट तमाम जज मलाई खाने के लिए जगह-जगह फिट कर दिए गये...फिर एक जज के यहां करोड़ों रूपए निकल आए...!!!चिन्नास्वामी स्वामीनाथन कर्णन उर्फ दलित जज सजा काट कर बाहर आ गये और सच भी बाहर आ‌ गया लेकिन...!!बकलम-चंदन कुमार.. ✍🏻 (लेखन में भाषाई सजावट मैंने की है)